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    संविदा महिला कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव से वंचित करना पड़ा महंगा, MP हाईकोर्ट ने राज्य शिक्षा केंद्र संचालक पर लगाया 50000 रुपये जुर्माना

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 06:09 PM (IST)

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संविदा महिला कर्मचारी को चाइल्ड केयर लीव से वंचित करने पर राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह पर 50 हजार रुपये का जुर् ...और पढ़ें

    -प्रतीकात्मक चित्र

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    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने संचालक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

    2. संविदा महिला कर्मचारी को तत्काल चाइल्ड केयर लीव स्वीकृत।

    3. न्यायिक व्याख्या विभागीय परिपत्रों से सर्वोपरि, कोर्ट ने कहा।

    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। बाल देखभाल अवकाश (चाइल्ड केयर लीव-CCL) के मामले में सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी करना राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह को भारी पड़ गया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संविदा महिला कर्मचारी की छुट्टी का आवेदन निरस्त करने वाले विभागीय आदेश को रद्द करते हुए संचालक पर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है।

    न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने यह आदेश बुरहानपुर निवासी संविदा महिला कर्मचारी आयशा शेख की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया।

    नौवीं बार कोर्ट पहुंची याचिकाकर्ता

    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता निखिल तिवारी ने अदालत को बताया कि आयशा शेख को अपने अधिकार के लिए नौवीं बार कोर्ट की शरण में है, जो विभागीय मनमानी को दर्शाता है। राज्य शिक्षा केंद्र ने 16 जुलाई को उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि सामान्य प्रशासन विभाग के 22 जुलाई 2023 के परिपत्र के अनुसार संविदा कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव का लाभ नहीं दिया जा सकता।

    कोर्ट ने कहा- न्यायिक व्याख्या सर्वोपरि

    हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1977 के नियम 38-सी के तहत महिला सरकारी कर्मचारियों को 730 दिन तक चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान है। वहीं पूर्व के न्यायिक निर्णयों के अनुसार संविदा महिला कर्मचारियों को भी दो बच्चों की देखभाल के लिए 240 दिन तक सीसीएल का अधिकार प्राप्त है।

    अदालत ने कहा कि कानून की अंतिम व्याख्या न्यायालय करता है और कोई भी विभागीय परिपत्र न्यायिक आदेशों से ऊपर नहीं हो सकता।

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    तत्काल छुट्टी देने और जुर्माना जमा करने के निर्देश

    हाई कोर्ट ने राज्य शिक्षा केंद्र को याचिकाकर्ता को तत्काल बाल देखभाल अवकाश स्वीकृत करने का निर्देश दिया। साथ ही संचालक हरजिंदर सिंह को 30 दिनों के भीतर 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना जमा करने का आदेश भी दिया।

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    यह फैसला संविदा महिला कर्मचारियों के अवकाश संबंधी अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक अहम न्यायिक मिसाल भी बनेगा।