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    'न्यायाधीश को डराने का अधिकार किसी को नहीं', महिला जज को धमकी मामले में हाई कोर्ट सख्त, डीजीपी ने पेश किया हलफनामा

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 08:42 PM (IST)

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिवनी मालवा में गो-तस्करी मामले के आरोपितों को सजा सुनाने वाली जज तबस्सुम खान को मिली धमकियों पर सुनवाई की। कोर्ट ने न्यायिक ...और पढ़ें

    मप्र हाईकोर्ट भवन (फाइल फोटो)

    मप्र हाईकोर्ट भवन (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. जज तबस्सुम खान को मिली धमकियों पर सुनवाई।

    2. हाई कोर्ट ने न्यायिक स्वतंत्रता पर दिया जोर।

    3. डीजीपी ने न्यायाधीश की सुरक्षा का ब्यौरा दिया।

    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में गो-तस्करी और मॉब लिंचिंग से जुड़े हत्या के मामले में 14 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने वाली सेशन जज तबस्सुम खान को इंटरनेट मीडिया पर मिली धमकियों के मामले में गुरुवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की खंडपीठ के समक्ष पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की ओर से हलफनामा पेश कर न्यायाधीश की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया गया।

    महिला न्यायाधीश को इंटरनेट मीडिया पर धमकियां मिलने के मामले को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद राज्य सरकार और पुलिस विभाग को निर्देश दिए गए थे कि वे हलफनामे के माध्यम से अदालत को बताएं कि न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

    सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि सेशन जज को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही इंटरनेट मीडिया पर की गई आपत्तिजनक पोस्ट के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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    इस मामले की पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी न्यायिक निर्णय से असहमति होने पर उसका वैधानिक उपाय अपील है, न कि न्यायाधीश को धमकी देना। अदालत ने दोहराया कि कानून के शासन में हर व्यक्ति को फैसले के खिलाफ कानूनी चुनौती देने का अधिकार है, लेकिन किसी भी न्यायाधीश को डराने, धमकाने या दबाव में लाने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता।

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