आर्मी अफसर के विरुद्ध दुष्कर्म की FIR निरस्त, MP हाईकोर्ट ने शादी के झूठे वादे की दलील को किया खारिज
न्यायमूर्ति विनय सराफ की एकलपीठ ने इसे आपसी सहमति का मामला माना, यह कहते हुए कि 13 साल तक चले रिश्ते को शादी के झूठे वादे पर आधारित नहीं कहा जा सकता। ...और पढ़ें

मप्र हाईकोर्ट भवन (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में आर्मी अफसर के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति विनय सराफ की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि मामला आपसी सहमति का है और इसे आपराधिक दायरे में नहीं रखा जा सकता।
कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि दोनों के बीच लंबे समय तक चले रिश्ते को देखते हुए यह कहना उचित नहीं कि संबंध केवल शादी के झूठे वादे के आधार पर बने थे। अदालत ने यह भी कहा कि जब रिश्तों में खटास आई, तब दबाव बनाने के उद्देश्य से एफआईआर दर्ज कराई गई।
13 साल तक जारी रहे संबंध
मामले के अनुसार, दोनों की मुलाकात 2012 में भोपाल स्थित आर्मी कैंटीन में हुई थी, जिसके बाद बातचीत और संबंधों का सिलसिला शुरू हुआ। महिला ने आरोप लगाया था कि आर्मी अफसर ने खुद को अविवाहित बताया, जबकि बाद में उसके शादीशुदा होने की जानकारी मिली। इसके बावजूद दोनों के बीच संबंध 2025 तक जारी रहे।
कोर्ट ने साक्ष्यों को माना कमजोर
हाई कोर्ट ने पाया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 (धोखे से संबंध बनाना) और धारा 351(2) के तहत आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। 13 वर्षों के लंबे रिश्ते को देखते हुए अदालत ने इसे सहमति का मामला माना।
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कानून के दुरुपयोग पर टिप्पणी
अदालत ने इस मामले को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए आर्मी अफसर की याचिका स्वीकार कर ली और एफआईआर को निरस्त करने का आदेश दिया।