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    ‘एक साल के बच्चे पर 'आय से अधिक संपत्ति' का केस?’; MP हाईकोर्ट ने EOW की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

    Updated: Thu, 19 Mar 2026 03:27 PM (GMT+05:30)

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अनुपातहीन संपत्ति मामले में EOW की जांच प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने पूछा कि जब याचिकाकर्ता नाबालिग था, तब उसकी स ...और पढ़ें

    एमपी हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी (प्रतीकात्मक चित्र)

    एमपी हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी (प्रतीकात्मक चित्र)

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    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। अनुपातहीन संपत्ति के एक मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब याचिकाकर्ता नाबालिग था, तब उसकी संपत्ति की जांच किस आधार पर की जा रही है।

    न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान EOW की कार्यप्रणाली को तर्कहीन बताते हुए उसके डीजी और विधिक सलाहकार को सात दिन के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया कानूनसम्मत और तार्किक होनी चाहिए।

    ‘चेक पीरियड’ पर उठे गंभीर सवाल

    याचिकाकर्ता कृष्ण प्रताप सिंह चंदेल की ओर से बताया गया कि उनका जन्म 1996 में हुआ, जबकि EOW ने 1997 से 2021 तक की अवधि को जांच का आधार बना लिया। यानी जिस समय से जांच शुरू मानी गई, उस वक्त याचिकाकर्ता महज एक वर्ष का था।

    कोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए पूछा कि जब व्यक्ति न तो सरकारी सेवा में था और न ही आय अर्जित करने की स्थिति में, तो उस अवधि की संपत्ति को आय से अधिक कैसे माना जा सकता है।

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    भाई के खिलाफ केस में पूरे परिवार को घसीटा

    दरअसल, इस मामले की शुरुआत याचिकाकर्ता के भाई के खिलाफ दर्ज एफआईआर से हुई थी, जो एक समिति में प्रबंधक पद पर कार्यरत थे और उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप थे।

    जांच के दौरान EOW ने दायरा बढ़ाते हुए परिवार के अन्य सदस्यों को भी शामिल कर लिया, जिसमें याचिकाकर्ता का नाम भी जोड़ दिया गया। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

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    नौकरी से बर्खास्तगी पर भी सवाल

    सबसे अहम पहलू यह है कि इसी जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर याचिकाकर्ता को उनकी सरकारी नौकरी से हटा दिया गया। याचिका में इसे अनुचित बताते हुए चुनौती दी गई है।

    हाईकोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। अब EOW को यह स्पष्ट करना होगा कि उसने किन तथ्यों और कानूनी आधार पर इतनी लंबी अवधि को जांच में शामिल किया।