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    MP OBC Reservation: 27% आरक्षण पर हाई कोर्ट में अंतिम बहस पूरी, फैसला सुरक्षित

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 05:54 PM (IST)

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हो गई है। विशेष युगलपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्ष ...और पढ़ें

    -प्रतीकात्मक चित्र

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    HighLights

    1. हाई कोर्ट में 27% ओबीसी आरक्षण पर अंतिम सुनवाई पूरी।

    2. विशेष युगलपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रखा।

    3. निर्णय का असर सरकारी भर्तियों और नियुक्तियों पर पड़ेगा।

    डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद में बुधवार को अहम मोड़ आ गया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ के समक्ष मामले की अंतिम सुनवाई पूरी हो गई। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति विनय सराफ की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। करीब ढाई घंटे से अधिक चली सुनवाई में आरक्षण की संवैधानिक वैधता से लेकर 50 प्रतिशत की सीमा और ओबीसी आबादी से जुड़े आंकड़ों तक विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तार से बहस हुई।

    50 प्रतिशत की सीमा से लेकर पिछड़ेपन के आंकड़ों पर बहस

    अंतिम सुनवाई के दौरान पक्षकारों ने आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों, ओबीसी की आबादी, पिछड़ेपन के आंकड़ों, क्रीमीलेयर और सरकारी नियुक्तियों में लंबित पदों जैसे मुद्दों पर अपनी अंतिम दलीलें रखीं।

    27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला वर्ष 2019 में आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के बाद से न्यायिक प्रक्रिया में है। इस निर्णय को लेकर पक्ष और विपक्ष में कई याचिकाएं दायर की गई थीं।

    27% आरक्षण बरकरार रखने की मांग

    ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने अंतिम दलीलों में 27 प्रतिशत आरक्षण को बरकरार रखने की मांग की। उन्होंने तत्कालीन सरकार की ओर से अक्टूबर 2019 में दाखिल 555 पेज के जवाब का हवाला देते हुए ओबीसी की आबादी से संबंधित आंकड़े अदालत के सामने रखे।

    बहस के दौरान उन्होंने सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से 12वीं तक पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने का सुझाव भी रखा।

    यह भी पढ़ें- MP में 27% OBC आरक्षण पर हाई कोर्ट में बहस: अधिवक्ता बोले- आरक्षण खत्म करें, सरकारी स्कूलों से पढ़ने वालों को दें नौकरी में प्राथमिकता

    फैसले पर अभ्यर्थियों और सरकार की नजर

    अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने सभी पक्षों के अधिवक्ताओं को उनकी कानूनी दलीलों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि लंबी सुनवाई के दौरान सामने आए तर्क और पहलू अदालत के लिए भी सीखने वाला अनुभव रहे।

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    अब फैसला सुरक्षित होने के बाद ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों, राज्य सरकार और अन्य पक्षकारों की निगाह हाई कोर्ट के निर्णय पर टिक गई है। फैसले का सीधा असर उन सरकारी भर्तियों और नियुक्तियों पर भी पड़ सकता है, जिनमें 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर स्थिति लंबे समय से स्पष्ट नहीं हो सकी है।