पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में रिसॉर्ट निर्माण पर सख्ती, PCCF ने डिप्टी डायरेक्टर को किया तलब
पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में कथित तौर पर नियमों के विपरीत बने रिसॉर्ट मामले में नया मोड़ आया है। मध्य प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ...और पढ़ें

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में निर्मित रिसॉर्ट (फाइल फोटो)
HighLights
पन्ना टाइगर रिजर्व रिसॉर्ट मामले में पीसीसीएफ ने डिप्टी डायरेक्टर को तलब किया।
कोर जोन में नियमों के विपरीत रिसॉर्ट निर्माण का आरोप।
वन्यजीवों पर प्रभाव और कानूनी अनुमतियों की होगी जांच।
संजय कुमार शर्मा, उमरिया। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में कथित रूप से नियमों के विपरीत बनाए गए रिसॉर्ट के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. शमिता राजौरा ने पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल को तलब किया है। इस कदम के बाद मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि यह रिसॉर्ट वर्तमान में गुरुग्राम में पदस्थ वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार द्वारा छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव स्थित खसरा नंबर 1841 की लगभग पांच एकड़ भूमि पर बनवाया गया है। प्रारंभिक जांच में निर्माण को नियमों के विपरीत बताया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामले के सार्वजनिक होने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) ने इसका संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
निर्माण अनुमति और भूमि की वैधानिक स्थिति पर होगी पड़ताल
वन विभाग अब यह जांच करेगा कि कोर जोन में रिसॉर्ट निर्माण किन परिस्थितियों में हुआ, इसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं, तथा संबंधित भूमि की कानूनी स्थिति क्या है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि निर्माण से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन और संरक्षित क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ा है।
यदि जांच में अनुमति प्रक्रिया में अनियमितता, वन्यजीव संरक्षण नियमों का उल्लंघन या अन्य कानूनी खामियां सामने आती हैं, तो रिसॉर्ट के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण अत्यंत संवेदनशील विषय है। उनका मानना है कि इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन, विशेषकर केन नदी की ओर जाने वाले कॉरिडोर पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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विशेषज्ञों ने रिसॉर्ट से निकलने वाले अपशिष्ट और गंदे पानी के निस्तारण पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि अपशिष्ट प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से नहीं किया गया तो इसका असर केन नदी और आसपास के वन क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर पड़ सकता है। हालांकि इन सभी पहलुओं की पुष्टि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
NTCA से भी हो सकती है चर्चा
सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अधिकारियों से भी चर्चा कर सकती हैं। कोर जोन में निर्माण संबंधी एनटीसीए के दिशा-निर्देशों के संदर्भ में पूरे मामले की समीक्षा किए जाने की संभावना है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में रिसॉर्ट निर्माण की जानकारी मिली है। अधिक जानकारी के पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर को बुलाया है।
-डा. शमिता राजौरा, पीसीसीएफ वन्यजीव मध्य प्रदेश।