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    13 गांवों का हुआ विस्थापन, फिर पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में कैसे बना आलीशान रिसॉर्ट? वन विभाग की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल

    By Sanjay Kumar SharmaEdited By: Ravindra Soni
    Updated: Tue, 04 Aug 2026 05:30 PM (IST)

    पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में एक रिसॉर्ट के निर्माण से वन्यजीव संरक्षण नीति पर सवाल उठ गए हैं, जबकि पहले 13 गांवों का विस्थापन किया गया था। वन विभ ...और पढ़ें

    पन्ना रिजर्व के कोर क्षेत्र में निर्मित विवादित रिसॉर्ट (फाइल फोटो)

    पन्ना रिजर्व के कोर क्षेत्र में निर्मित विवादित रिसॉर्ट (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में आलीशान रिसॉर्ट का निर्माण।

    2. वन्यजीव संरक्षण हेतु 13 गांवों का पहले ही विस्थापन हुआ।

    3. वन विभाग की नीति और दोहरे मापदंडों पर गंभीर सवाल।

    संजय कुमार शर्मा, उमरिया। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव की खसरा नंबर 1841 की करीब पांच एकड़ भूमि पर बने रिसॉर्ट को लेकर वन संरक्षण और बाघ आवास की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वन्यजीव संरक्षण के नाम पर वर्षों पहले कोर क्षेत्र से 13 गांवों का स्वैच्छिक पुनर्वास कराया गया, लेकिन अब उसी संवेदनशील क्षेत्र में बड़े रिसॉर्ट का निर्माण होने से संरक्षण की नीति पर सवाल उठ रहे हैं।

    कोर क्षेत्र के अधिकांश गांवों का पुनर्वास

    जानकारी के अनुसार, कोर क्षेत्र में मूल रूप से 16 गांव थे। इनमें से 13 गांवों का पुनर्वास कर उन्हें कोर क्षेत्र से बाहर बसाया जा चुका है। वर्तमान में मनकी और जरधोवा जैसे कुछ गांव ही शेष हैं, जिनके पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है। वहीं, पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में 49 गांव स्थित हैं।

    वन्यजीवों के संरक्षण के नाम पर विस्थापन

    वन विभाग का तर्क हमेशा यह रहा है कि कोर क्षेत्र को मानव गतिविधियों से मुक्त रखने से बाघों और अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित एवं निर्बाध प्राकृतिक आवास मिलता है। इसी उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रामीणों का पुनर्वास किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब ग्रामीणों को संरक्षण के नाम पर बाहर किया गया तो उसी क्षेत्र में करीब पांच एकड़ भूमि पर रिसार्ट निर्माण कैसे करने दिया गया? इससे वन विभाग का अधिकारियों के दोहरे मापदंड का पता चलता है।

    संरक्षण की अवधारणा होगी कमजोर

    स्थानीय लोगों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े निर्माण, वाहन आवागमन, बिजली, पानी और मानव गतिविधियों का सीधा असर वन्यजीवों के व्यवहार और उनके प्राकृतिक आवास पर पड़ता है। यदि कोर क्षेत्र में व्यावसायिक निर्माण को इसी तरह रहने दिया जाता है तो इससे भविष्य में संरक्षण की पूरी अवधारणा कमजोर पड़ सकती है।

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    रिसॉर्ट निर्माण को लेकर पहले भी भूमि के स्वामित्व, पंजीयन प्रक्रिया और वन भूमि से जुड़े कई विवाद सामने आ चुके हैं। अब यह मामला वन संरक्षण की दृष्टि से भी चर्चा का विषय बन गया है।

    पर्यावरणविदों का मानना है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो चुकी है जिससे यह भी स्पष्ट हो चुका है कि निर्माण वन भूमि पर किया गया है जो वन्यजीव संरक्षण के लिए उचित नहीं है। इस निर्माण के दौरान वन्यजीव संरक्षण संबंधी किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।

    राजगढ़ गांव में बनाया गया रिसॉर्ट पन्ना टाइगर रिजर्व की जमीन पर है। इसे लेकर जांच की जा चुकी है और आगे की कार्रवाई जारी है।
    - वीरेंद्र पटेल, डिप्टी डायरेक्टर, पन्ना टाइगर रिजर्व।