Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पन्ना टाइगर रिजर्व में बने विवादित रिसॉर्ट पर कार्रवाई क्यों अटकी? जांच अधिकारी को हटाने पर उठे सवाल

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 10:02 PM (GMT+05:30)

    पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में एक वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी के अवैध रिसॉर्ट पर कार्रवाई अधिकारियों के संरक्षण के कारण रुकी हुई है। जांच करने वाले असिस् ...और पढ़ें

    पन्ना रिजर्व के कोर क्षेत्र में बना विवादित रिसॉर्ट।

    पन्ना रिजर्व के कोर क्षेत्र में बना विवादित रिसॉर्ट।

    HighLights

    1. पन्ना टाइगर रिजर्व में वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी का अवैध रिसॉर्ट।

    2. अधिकारियों के संरक्षण के कारण कार्रवाई में लगातार देरी।

    3. जांच अधिकारी को हटाया गया, सीईसी प्रमुख पर सवाल।

    डिजिटल डेस्क, पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन में छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव की खसरा नंबर 1841 की करीब पांच एकड़ भूमि पर नियम विरुद्ध तरीके से बने रिसॉर्ट पर अधिकारियों के संरक्षण के कारण ही अब तक कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यह रिसॉर्ट वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी बी श्रीनिवास कुमार का है, जो वर्तमान में हरियाणा के गुरुग्राम में तैनात हैं।

    पिछले वर्ष सितंबर में जांच करने वाले पन्ना टाइगर रिजर्व के तत्कालीन असिस्टेंट डायरेक्टर देवेंद्र अहिरवार को स्पष्टीकरण के लिए सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (सीईसी) के प्रमुख के समक्ष पेश होने के लिए भेजा गया था। जबकि सीईसी का वन विभाग की नियमित जांच प्रक्रिया से प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता। बाद में उन्हें वहां से हटा भी दिया गया।

    जांच अधिकारी को दिल्ली भेजने पर सवाल

    सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत सीईसी का दायरा बड़ी परियोजनाओं की निगरानी तक सीमित है। ऐसे में स्वतंत्र जांच कर रहे अधिकारी को समिति के समक्ष भेजे जाने पर सवाल उठ रहे हैं। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि सीईसी प्रमुख और विवादित रिसॉर्ट से जुड़े लोगों के बीच संबंध होने के कारण प्रदेश के वरिष्ठ वन अधिकारियों पर दबाव बना और जांच अधिकारी को दिल्ली भेजा गया।

    रिसॉर्ट पर हुई थी छापामार कार्रवाई

    इन्हीं संबंधों के चलते अभी तक वन भूमि पर बनाए गए रिसॉर्ट को तोड़ने की कोई कार्रवाई भी वन विभाग नहीं कर पा रहा है। सितंबर 2025 को तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) डॉ. वीएन अंबाडे पन्ना के दौरे पर थे। उन्हें वहीं वन भूमि पर रिसॉर्ट के निर्माण की सूचना वन्य प्राणी कार्यकर्ता अजय दुबे ने दी। इसके बाद उन्होंने विवादित रिसॉर्ट देखा। उनके पन्ना से लौटने के अगले ही दिन नौ सितंबर को असिस्टेंट डायरेक्टर ने कथित रूप से जंगल की जमीन पर बने रिसॉर्ट पर छापामार कार्रवाई की थी।

    खबरें और भी

    कार्रवाई के अगले ही दिन हुआ खेला

    आरोप है कि इस कार्रवाई के अगले ही दिन 10 सितंबर को तत्कालीन पीसीसीएफ (वन्यजीव) शुभरंजन सेन ने संबंधित अधिकारी को दिल्ली में उपस्थित होने के निर्देश दे दिए। सेन का कहना है कि सीईसी प्रमुख ने असिस्टेंट डायरेक्टर देवेंद्र कुमार को बुलाया था। अजय दुबे का कहना है कि वन भूमि पर रिसॉर्ट बनाने वाले बी श्रीनिवास कुमार का सीईसी प्रमुख चंद्रप्रकाश गोयल से संबंधों के चलते उनके रिसॉर्ट पर वन विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है।

    यह भी पढ़ें- पन्ना टाइगर रिजर्व में बने विवादित रिसॉर्ट पर नया खुलासा, भोपाल से आदिवासी को बुलाकर कराई गई थी रजिस्ट्री

    बड़े अधिकारियों का संरक्षण

    बताया जाता है कि नौ सितंबर को कार्रवाई करने के लिए जा रहे असिस्टेंट डायरेक्टर को तत्कालीन प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर अनुपम शर्मा ने रोकने का प्रयास किया था। वह इन दिनों पन्ना में ही साउथ वन मंडल के डीएफओ हैं। इससे स्पष्ट है कि वन विभाग के बड़े अधिकारियों का संरक्षण मिलने से रिसॉर्ट पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

    हमने असिस्टेंट डायरेक्टर देवेंद्र अहिरवार को नहीं भेजा था। सीईसी ने बुलाया था, इसलिए हमने जाने और दिल्ली प्रवास की अनुमति प्रदान की थी।
    - शुभरंजन सेन, तत्कालीन पीसीसीएफ (वन्यजीव)।