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    रेप केस में तरुण तेजपाल दोषी करार: बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले की 10 बड़ी बातें

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 11:34 PM (IST)

    बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने तरुण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया है। कोर्ट ने बचाव पक्ष द्वारा पीड़िता को कठघरे में खड़ा करने और ...और पढ़ें

    तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा

    तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा

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    राज्य ब्यूरो, मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने 2013 के चर्चित दुष्कर्म मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को दोषी ठहराते हुए अपने फैसले में इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि जिस तरह बचाव पक्ष ने पीड़िता को कठघरे में खड़ा किया और उसकी निजी जिंदगी पर ध्यान केंद्रित किया। साथ ही कहा कि उसे हैरानी है कि ट्रायल कोर्ट चुप रहा और बचाव पक्ष को जिरह के दौरान पीड़िता को परेशान एवं अपमानित करने दिया।

    जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अपना मामला संदेह से परे साबित कर दिया था और पीड़िता भी अपनी गवाही पर अडिग रही। इसलिए उसके भरोसेमंद और सुसंगत बयान पर विश्वास करने में कोई हिचकिचाहट नहीं थी।

    तेजपाल को रेप केस में 10 साल की सजा

    हाई कोर्ट ने कहा कि मापुसा के ट्रायल कोर्ट ने इस धारणा के साथ कार्यवाही की कि दुष्कर्म पीड़िता को एक खास तरह (स्टीरियो टाइपिकल) से व्यवहार करना चाहिए और इस मामले में पीड़िता को एक आदर्श पीड़िता (परफेक्ट विक्टिम) होना चाहिए था।

    हाई कोर्ट ने कहा, 'परफेक्ट विक्टिम या आइडियल विक्टिम की अवधारणा एक ऐसे अनकहे सांस्कृतिक आदर्श को बताती है जिसमें किसी व्यक्ति पर पूरी तरह से विश्वास किया जाता है, उसके प्रति सहानुभूति रखी जाती है और उसे तभी मान्यता दी जाती है जब वह पूरी तरह से कमजोर, पूरी तरह से निर्दोष और पूरी तरह से निष्क्रिय हो।'

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    कोर्ट ने कहा, 'परफेक्ट विक्टिम की ये धारणाएं महज मिथक हैं। विश्वसनीयता को तथ्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए, न कि इस आधार पर कि क्या पीड़ित व्यक्ति किसी संकीर्ण सांस्कृतिक सांचे में फिट बैठता है या नहीं।'

    कोर्ट ने आगे कहा कि जब कोई पीड़िता इस सांचे में फिट नहीं बैठती, तो उसके सदमे (ट्रामा) को कम करके आंका जाता है। हाई कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति सदमे का सामना अलग-अलग तरह से करता है और न तो कोर्ट और न ही आरोपित यह तय कर सकते हैं कि यौन हमले के बाद पीड़िता को किस तरह की प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी या अपने सदमे से कैसे निपटना चाहिए था।

    पीड़िता के साथ कई बार दुष्कर्म 

    हाई कोर्ट ने कहा कि घटना के समय तेजपाल 'तहलका' के एडिटर-इन-चीफ और मालिक थे, जबकि पीड़िता मैगजीन में प्रमुख संवाददाता थी; इसलिए इसमें कोई शक नहीं कि तेजपाल का उस पर नियंत्रण और दबदबा था। उन्होंने पीड़िता के साथ एक बार नहीं, बल्कि लगातार दो दिनों में दो बार दुष्कर्म किया। उन्होंने पीड़िता को इस बात के लिए भी शर्मिंदा करने की कोशिश की कि उसने उनकी बेटी को इस बारे में बताया था।

    कोर्ट ने बचाव पक्ष को भी फटकार लगाई क्योंकि उसने पीड़िता की जीवनशैली को इस तरह पेश किया जैसे वह आजाद ख्यालों वाली और अनैतिक महिला हो। साथ ही कहा, उसे भी कानून से सुरक्षा पाने का पूरा अधिकार है। सिर्फ इसलिए कि उस पर चरित्रहीन होने का आरोप है, उसके सुबूतों को खारिज नहीं किया जा सकता।

    इस आधार पर यह नतीजा भी नहीं निकाला जा सकता कि किसी महिला के चरित्र पर सवाल होने की वजह से उसके साथ दुष्कर्म किया जा सकता है। हर महिला को यह अधिकार है कि वह किसी के भी साथ सेक्स करने से इन्कार कर सके।

    इन धाराओं में ठहराया दोषी

    हाई कोर्ट ने तेजपाल को आइपीसी की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया है। इनमें धारा 376(2)(एफ) (भरोसे या अधिकार की स्थिति में मौजूद व्यक्ति द्वारा दुष्कर्म), धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(बी) (कपड़े उतारने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल) शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि धारा 376(2)(एफ) के तहत अधिकतम सजा आजीवन कारावास है।

    बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले से जुड़े 10 अहम बातें

    नवंबर, 2013 : पीड़िता ने आरोप लगाया कि तेजपाल ने गोवा के होटल की लिफ्ट में उसके साथ दुष्कर्म किया। ईमेल के जरिये प्रबंध संपादक से शिकायत की।
    20 नवंबर, 2013 : तेजपाल ने एक ईमेल में अपने व्यवहार को अनुचित और निर्णय लेने में बड़ी चूक बताया।
    22 नवंबर, 2013 : गोवा पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेकर तेजपाल के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की।
    30 नवंबर, 2013 : सुप्रीम कोर्ट के अग्रिम जमानत से इन्कार पर तेजपाल ने गोवा पुलिस के समक्ष समर्पण किया।
    फरवरी, 2014 : गोवा पुलिस ने अदालत में 2,800 से अधिक पृष्ठों का आरोप-पत्र दाखिल किया।
    एक जुलाई, 2014 : सात महीने की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को नियमित जमानत दी।
    सितंबर, 2017: गोवा के मापुसा में अतिरिक्त सत्र अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।
    21 मई, 2021 : अतिरिक्त सत्र अदालत ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी किया।
    मई, 2021 : गोवा सरकार की अपील पर बांबे हाई कोर्ट ने तेजपाल को नोटिस जारी किया।
    छह अगस्त, 2026: हाई कोर्ट ने बरी करने के फैसला रद किया और तेजपाल को 10 वर्ष की सजा सुनाई।

    सत्ता के विरुद्ध बोलने वालों को बनाया जा रहा निशाना : तेजपाल

    तरुण तेजपाल ने हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद दावा किया कि जो लोग सत्ता में बैठे लोगों के विरुद्ध बोलते या लिखते हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, 'हमें कोई शक नहीं है कि पिछले 13 वर्षों से वे तहलका के साथ मेरे काम की वजह से मेरे पीछे पड़े हैं। ट्रायल कोर्ट में सात वर्ष तक केस लड़ने के बाद हम बरी हो गए थे, लेकिन वे फिर से हमारे पीछे पड़ गए हैं।'

    उन्होंने दावा किया, 'जो लोग उनके साथ हैं, वे बरी हो जाते हैं, लेकिन जो लोग उनके विरुद्ध पत्रकारिता करते हैं या उनके विरुद्ध कुछ कहते हैं, वे ऐसे लोगों के पीछे पड़ जाते हैं। पिछले 12 वर्षों में ऐसे कई मामले देखिए जिनमें उन्होंने अपने विरोधियों को फंसाया है। उमर खालिद पिछले छह वर्ष से जेल में है, हमारे जैसे और भी कई लोग हैं।'

    तेजपाल ने आरोप लगाया, 'उन्होंने मेरी पत्रकारिता रोक दी है, उन्होंने तहलका को रोक दिया है, उन्होंने मेरी किताबों की छपाई रोक दी है। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। इतनी बड़ी न्यायपालिका में ऐसे जज जरूर होंगे जो मेरा सच देखेंगे। सच सामने आएगा।'

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