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    'पेपर लीक के दोषियों को फांसी दो', सुसाइड करने वाली NEET छात्रा की मां ने उठाई मांग

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 02:56 PM (IST)

    नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाली छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मां ने दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की है। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस् ...और पढ़ें

    सुसाइड करने वाली नीट छात्रा की मां ने की दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग।

    सुसाइड करने वाली नीट छात्रा की मां ने की दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग।

    डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोई भी कदम उनकी बेटी को वापस नहीं ला सकता लेकिन उन्हें इंसाफ की उम्मीद है। आत्महत्या करने वाली NEET की एक छात्रा की मां ने अब पेपर लीक के दोषियों के लिए सिर्फ मौत की सजा की मांग की है।

    नीट पेपर लीक को लेकर हो रहे जबरदस्त विरोध के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने कल शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन इससे क्या हासिल होगा, यह सवाल नीलम चतुर्वेदी ने पूछा। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक के दोषियों को फांसी दी जाए।

    'इस्तीफे से खत्म नहीं होती जवाबदेही'

    उनकी बेटी आकांक्षा चतुर्वेदी ने इस साल की शुरुआत में नीट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम रद होने के बाद 20 मई को नागपुर में आत्महत्या कर ली थी। इसके एक महीने बाद दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी। कल मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह छात्रों के आंदोलन का समर्थन करती हैं लेकिन इस्तीफे से जवाबदेही खत्म नहीं होती।

    'पेपर लीक में शामिल लोगों को मिले मौत की सजा'

    उन्होंने कहा, "हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से संतुष्ट नहीं हैं। हमने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है। पेपर लीक में शामिल लोगों को मौत की सजा मिलनी चाहिए।" मूल रूप से मध्य प्रदेश की रहने वाली आकांक्षा नीट परीक्षा की तैयारी के लिए अपने परिवार के साथ नागपुर चली गई थीं। उन्होंने तैयारी के लिए एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया था।

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    अकांक्षा की मां ने बताया कि उसने 3 मई को नीट की परीक्षा दी थी और कहा था कि पेपर अच्छा गया था लेकिन परीक्षा रद होने के बाद उसने आत्महत्या कर ली। उन्होंने दुखे जताते हुए कहा, "आकांक्षा के पिता को दो बार हार्ट अटैक आ चुका है और उन्हें लकवा भी मार गया है। अब हमारी देखभाल कौन करेगा? अगर मेरी बेटी जिंदा होती तो वह सब कुछ संभाल लेती।"

    सुसाइड नोट में आकाक्षा ने क्या लिखा था?

    अपने हाथ से लिखे सुसाइड नोट में 18 साल की छात्रा ने उस भारी भावनात्मक बोझ का जिक्र किया था जिसे वह ढो रही थी। नोट में लिखा था, "मम्मी-पापा आपको भरोसा था कि आपकी बेटी मन लगाकर पढ़ाई करेगी और डॉक्टर बनेगी लेकिन अब मुझमें दोबारा नीट परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है। पहली बार में मेरे अच्छे मार्क्स आए थे लेकिन अब इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मैं दोबारा अच्छा कर पाऊंगी। मुझे माफ कर देना मम्मी-पापा। मैंने सब कुछ बर्बाद कर दिया।"

    अकांक्षा के परिवार वालों के मुताबिक, उसके पिता ने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए आर्थिक जोखिम उठाए थे। घर का खर्च और बेटी की कोचिंग की फीस चुकाने के लिए वे जमीन के एक छोटे से टुकड़े पर खेती करते थे और नागपुर में रसोइए का काम भी करते थे।

    उसके चाचा जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी ने बताया कि घर लौटने पर वह खुश लग रही थी। उन्होंने कहा कि 650 से ज्यादा अंक लाने को लेकर आश्वस्त रहने वाली वह छात्रा पेपर लीक होने के बाद गहरे सदमे में चली गई और उसने खाना-पीना और ज्यादा बातचीत करना छोड़ दिया था। उन्होंने कहा, "हम नहीं सोचा था कि चीजें इस तरह से खत्म होंगी।"

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