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    CBSE Board 12th Result 2026: आखिर कैसे तैयार होती है सीबीएसई बोर्ड मार्कशीट, जानें ग्रेस मार्क्स से कैसे होते हैं पास

    Updated: Wed, 13 May 2026 02:09 PM (GMT+05:30)

    सीबीएसई कक्षा बारहवीं परीक्षा का रिजल्ट इसी सप्ताह जारी किया जा सकता है। ऐसे में रिजल्ट जारी होने से पहले आप यहां इस लेख के माध्यम से जान सकते हैं कि ...और पढ़ें

    CBSE Board 12th Result 2026 Date: जल्द ही जारी होगा रिजल्ट।

    CBSE Board 12th Result 2026 Date: जल्द ही जारी होगा रिजल्ट।

    HighLights

    1. सबसे पहले सब्जेक्ट एक्सपर्ट कॉपियों की जांच करते हैं।

    2. छात्रों को ग्रेस मार्क्स भी दिए जाते हैं।

    एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। हर साल लाखों छात्र CBSE बोर्ड परीक्षा शामिल होते हैं। इस साल भी लगभग 44 लाख से ज्यादा छात्र एवं छात्राओं ने कक्षा दसवीं एवं बारहवीं की परीक्षा में भाग लिया था। हालांकि बोर्ड द्वारा कक्षा 10वीं के परिणाम जारी किए जा चुके हैं। लेकिन CBSE Board 12th Result का इंतजार अभी बाकी है।

    अगर आप भी इस साल सीबीएसई की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए थे और अब नतीजों का इंतजार कर रहें हैं, तो क्या आप जानते हैं कि मार्कशीट में अंकित नंबर किस आधार पर फाइनल किए जाते हैं। अगर नहीं तो आज इस लेख के माध्यम से हम आपको परीक्षा देने से लेकर कॉपियों के मूल्यांकन और डिजीटल मार्क्स अपलोड करने तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझाएंगे।

    डिजिटल अपलोड होते हैं मार्क्स

    सीबीएसई परीक्षा पूरी होने के बाद सबसे पहले सभी एग्जाम सेंटर से कॉपियों को मूल्यांकन केंद्रों में भेजा जाता है। इसके बाद सब्जेक्ट एक्सपर्ट कॉपियों की जांच करते हैं और छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर अंक देते हैं। इसके बाद डिजिटल पोर्टल पर मार्क्स अपलोड किए जाते हैं। आपको बता दें, CBSE द्वारा रीयल-टाइम डाटा एंट्री सिस्टम को अपनाया गया है। इससे मार्क्स अपलोड करते वक्त गलतियों की संभावना कम होती है। साथ ही इस प्रक्रिया से समय की भी बचत होती है।

    मॉडरेशन सिस्टम भी जरूरी

    परीक्षा में छात्रों की मेहनत यूंही जाया न जाए। इसलिए निष्पक्ष परिणामों के लिए सीबीएसई द्वारा मॉडरेशन सिस्टम को अपनाया गया है। अब सवाल आता है कि आखिर मॉडरेशन सिस्टम क्या होता है। दरअसल सीबीएसई की परीक्षा में पेपर अलग-अलग सेट में होते हैं और इन सभी सेट की कठिनाई का स्तर भी अलग-अलग होता है। बस इसी अंतर को संतुलन करने के लिए मॉडरेशन पद्धति को अपनाया जाता है। ताकि कठिन सेट वाले छात्र को पेपर की कठिनाई की वजह से कोई नुकसान न हो।

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    क्यों दिए जाते हैं ग्रेस मार्क्स

    सीबीएसई ने ग्रेस मार्किंग सिस्टम को भी अपनाया है। ग्रेस मार्किंग उन छात्रों के लिए फायदेमंद होती है, जो बोर्ड परीक्षा में महज एक या दो नंबर से पीछे रह जाते हैं। सीबीएसई बोर्ड पॉलिसी के तहत ऐसे छात्रों को ग्रेस मार्क्स देकर फेल होने से बचाया जाता है, ताकि उनका पूरा साल बर्बाद न हो। कॉपियों का मूल्यांकन पूरा होने के पश्चात कॉपियों की दोबारा जांच की जाती है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मूल्यांकन पद्धति का सही पालन हुआ है या नहीं।

    इंटरनल मार्क्स भी अपलोड होते हैं

    कॉपियों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद स्कूल द्वारा सीबीएसई बोर्ड को भेजे गए इंटरनल और प्रैक्टिकल मार्क्स को पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। ऐसे में अगर स्कूल द्वारा किसी छात्र को इंटरनल या प्रैक्टिकल परीक्षा में मार्क्स ज्यादा दिए जाते हैं, तो सीबीएसई बोर्ड द्वारा उन छात्रों का रिकॉर्ड भी चेक किया जाता है।

    डाटा वेरिफाई और डिजीलॉकर में स्टोर

    कॉपियों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद और अंकों को पोर्टल पर अपलोड करने के बाद छात्रों का नाम, रोल नंबर, विषय और प्राप्त अंकों की जांच दोबारा की जाती है। ताकि कोई भी त्रुटि न रह जाए। इसके साथ ही मार्कशीट की ओरिजनल कॉपी को डिजीलॉकर पर भी उपलब्ध करवाया जाता है। छात्र डिजीलॉकर पर जाकर कभी भी अपनी मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं।

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