अब AI बताएगा मानसून का हाल, 4 हफ्ते पहले ही पता चल जाएगा कब और कहां होगी बारिश
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने AI आधारित नई मौसम पूर्वानुमान प्रणालियां शुरू की हैं। ये प्रणालियां चार सप्ताह पहले ही हर एक किलोमीटर के दायरे में वर्षा का ...और पढ़ें

AI से पता चलेगा मानसून (फोटो-पीटीआई)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अब मानसून का इंतजार सिर्फ आसमान देखकर नहीं करना पड़ेगा। देश में मौसम पूर्वानुमान की व्यवस्था बड़े तकनीकी बदलाव के दौर में पहुंच गई है।
भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ऐसी नई प्रणाली शुरू की है, जो चार सप्ताह पहले तक जिलावार मानसून की प्रगति का अनुमान दे सकेगी।
साथ ही उत्तर प्रदेश में एक किलोमीटर क्षेत्र तक वर्षा पूर्वानुमान देने वाली नई सेवा भी प्रारंभ कर दी गई है, जो दस दिन पहले तक स्थानीय मौसम की जानकारी देगी।
दोनों प्रणालियों से खेती की बेहतर योजना बनाने, शहरों को जलभराव और ड्रेनेज प्रबंधन संभालने और प्रशासन को आपदा से निपटने में मदद मिलेगी। इस तरह की हाइपर-लोकल सेवाओं का विस्तार देश के अन्य हिस्सों में भी किया जाएगा।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को दोनों प्रणालियों की शुरुआत की। पहली प्रणाली मानसून की प्रगति का एआई आधारित पूर्वानुमान है और दूसरी उत्तर प्रदेश उच्च स्थानिक रिजोल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान सेवा है।
इन्हें आईएमडी, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र ने मिलकर विकसित किया है।
AI से पता चलेगा मानसून
एआई आधारित मानसून प्रणाली हर बुधवार को अगले चार सप्ताह तक मानसून का पूर्वानुमान जारी करेगी। यह सेवा 16 राज्यों और तीन हजार से अधिक उप-जिलों के लिए तैयार की गई है। इससे बुआई, सिंचाई, खाद प्रबंधन और फसल सुरक्षा जैसे फैसले समय रहते ले सकेंगे।
इस प्रणाली में एआई मॉडल, विस्तारित अवधि पूर्वानुमान प्रणाली और तकनीकों को एक साथ जोड़ा गया है। अभी तक लंबे समय के मौसम अनुमान बड़े भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित रहते थे, लेकिन नई तकनीक जिला और उप-जिला स्तर तक जानकारी देने में सक्षम होगी।
प्रत्येक किलोमीटर में बारिश का पूर्वानुमान
उत्तर प्रदेश में शुरू उच्च स्थानिक रिजोल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान प्रणाली मौसम सेवाओं को और अधिक सूक्ष्म अध्ययन करेगी। प्रत्येक किलोमीटर में बारिश का अनुमान लगाया जा सकेगा।
इसमें स्वचालित वर्षामापी, डाप्लर रडार एवं उपग्रह आधारित डेटा का उपयोग किया गया है। इससे जिले या शहर के भीतर भी अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता और समय का सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा।
ऐसी हाइपर-लोकल सेवाएं केवल खेती तक सीमित नहीं रहेंगी। शहरी इलाकों में जलभराव रोकने, ट्रैफिक प्रबंधन, एयर ट्रैफिक नियंत्रण, बिजली वितरण, जलाशयों के संचालन और आपदा प्रबंधन में भी इनका बड़ा उपयोग होगा।
भारी बारिश या अचानक मौसम बदलने की स्थिति में प्रशासन पहले से तैयारी कर सकेगा।दस वर्ष पहले देश में केवल 16-17 डाप्लर रडार थे। अब उनकी संख्या 50 तक पहुंच गई है।
मिशन मौसम के तहत 50 और रडार लगाए जाने की योजना है। गंभीर मौसम घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में पिछले दस वर्षों में 40 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। वहीं चक्रवात की दिशा, तीव्रता और तट से टकराने के समय का पूर्वानुमान भी पहले से कहीं अधिक भरोसेमंद बना है।