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    'सरकार भी झुकती है, झुकाने वाला चाहिए', एंटी-पेपर लीक बिल पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 08:11 PM (IST)

    लोकसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताई। ...और पढ़ें

    एंटी-पेपर लीक बिल पर लोकसभा में बहस (फोटो-एएनआई)

    एंटी-पेपर लीक बिल पर लोकसभा में बहस (फोटो-एएनआई)

    HighLights

    1. परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर सहमति।

    2. विपक्ष ने 20 से अधिक पेपर लीक पर सरकार को घेरा।

    3. छात्र आंदोलन के दबाव में सरकार के झुकने का आरोप।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एंटी-पेपर लीक बिल पर लोकसभा में चर्चा के दौरान यूं तो सत्तापक्ष और विपक्ष के खेमे बंटे हुए थे, लेकिन एक बात पर सभी सहमत दिखे कि परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना ही होगा।

    विपक्ष ने सरकार को घेरा

    अखिलेश यादव- यदि मौजूदा कानून प्रभावी था तो भाजपा शासन में 20 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर कैसे लीक हो गए।सरकार छात्र आंदोलन के दबाव में झुक गई और अंततः उनकी मांगें मानने को मजबूर हुई। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी उसी का परिणाम था।

    भाजपा ने धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचाया है। यह देश का पहला ऐसा छात्र आंदोलन था, जिसे अभिभावकों का खुला समर्थन मिला।

    नई पीढ़ी ने साबित कर दिया कि सरकार भी झुकती है, झुकाने वाला चाहिए। उन्होंने आंदोलन के दौरान छात्रों से किए गए सभी वादे पूरे करने की मांग की।

    डिंपल यादव ने छात्रों की आत्महत्या पर सरकार से पूछे सवाल

    डिंपल यादव- 20 छात्रों ने आत्महत्या की फिर भी सरकार ने आंदोलन कर रहे युवाओं के साथ संवेदनशील व्यवहार नहीं किया। प्रदर्शनकारियों के साथ दमनात्मक रवैया अपनाया गया, जबकि छात्र केवल जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

    आलोक कुमार सुमन ( जदयू सांसद) पर्चा लीक और नकल सामाजिक बुराई है। इसके पीछे सक्रिय गिरोहों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है। देश को परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए व्यापक राष्ट्रीय परीक्षा ईमानदारी व्यवस्था विकसित करनी होगी ताकि युवाओं की मेहनत नकल माफिया की कमाई का जरिया न बने।

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    अरुण भारती(लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) हम शुरू से छात्रों की मांगों के समर्थन में रहे हैं। पेपर लीक किसी स्थिति में स्वीकार नहीं है और परीक्षा प्रणाली संविधान में मिले समान अवसर के अधिकार का आधार है। परीक्षा रद्द होने का बोझ सभी छात्रों पर समान रूप से नहीं पड़ता है। इसलिए व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि ईमानदार छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।

    सुप्रिया सुले (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद) जंतर-मंतर की पुलिस कार्रवाई की एसआईटी जांच होनी चाहिए। यह राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य का सवाल है, इसलिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ जवाब देना चाहिए।

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