'मील का पत्थर साबित होगा एंटी-पेपर लीक बिल', लोकसभा में बहस के दौरान बोले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह
संसद में विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा शुरू हुई, जिसे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 'मील का पत्थर' बताया। ...और पढ़ें
-1785252636978_m.webp)
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विपक्ष के हंगामे के कारण से बाधित संसद का गतिरोध मंगलवार को लोकसभा में पेपर लीक विधेयक पर चर्चा शुरू होने के साथ टूटा। हालांकि रुख नहीं बदले।
आरोप प्रत्यारोप की ही बौछार रही। सरकार की ओर से पेपर लीक से जुड़ा विधेयक प्रस्तुत करते केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि यह मील का पत्थर साबित होगा।
वहीं, यूपीए सरकार और अन्य राज्यों में विभिन्न सरकारों के समय हुई परीक्षा में धांधलियों व पेपर लीक की घटनाओं की याद दिलाते हुए उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लिया और चेताया कि जिसे इस बिल पर आपत्ति होगी, उससे देश की जनता को आपत्ति होगी।
जबकि विपक्ष ने आगाह किया कि पुराने कानून से पेपर लीक नहीं रुका तो संशोधित कानून से बहुत उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

पहले भी होते रहे हैं पेपर लीक: जितेंद्र सिंह
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बिल प्रस्तुत करते हुए कहा कि परीक्षा को लेकर तरह-तरह की घटनाएं होती रही हैं।
पेपर लीक भी होता रहा। यह एक प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पार्टियों की सरकारें रहीं। ऐसा पहले भी होता रहा, सूची लंबी है।
उन्होंने 2009 में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा, पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा, 2010 में उत्तर प्रदेश में बीएड प्रवेश परीक्षा, 2011 में आल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम, 2012 में एम्स दिल्ली का पेपर लीक, तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन पेपर लीक, 2023 में महाराष्ट्र सेकंडरी सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन जैसी घटनाएं याद दिलाते कहा कि यह सब देखते हुए ही मोदी सरकार ने महसूस किया कि इसके लिए अलग से कानून की आवश्यकता है।
कांग्रेस ने जताई थी NTA के गठन की आवश्यकता
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का गठन इसी सरकार ने 2017 में किया। उन्होंने कहा कि 1992 में पहली बार कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने ही राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग एजेंसी की आवश्यकता बताई। 2010 में यूपीए सरकार के दौरान भी विशेषज्ञ समिति ने इसकी सिफारिश की, लेकिन पता नहीं किन कारणों से इस पर चर्चा आगे नहीं बढ़ी।
पहली बार 2024 में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) कानून बनाया गया। उससे पहले ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए कोई भी अलग से कानून ही नहीं था। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाक्रम का संज्ञान लेते हुए पीएम ने निर्णय लिया कि हमें इसी विधेयक को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
खबरें और भी
बांसुरी स्वराज ने की पीएम की तारीफ
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि इस संशोधन को लाना पीएम मोदी की संवेदनशीलता और जिम्मेदाराना सरकार का प्रमाण है।
अब परीक्षा माफिया संगठित हो गया है। यह संशोधन देश के युवाओं के सपनों को सुरक्षित करेगा। उन्होंने कहा कि बहस तथ्यों और प्रमाणों पर होनी चाहिए, पूर्वाग्रहों पर नहीं।
कांग्रेस और विपक्ष के साथी नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि पेपर लीक की समस्या 2014 के बाद शुरू हुई, जबकि पिछला एक दशक यूपीए का था, तब 22 बार पेपर लीक के कारण परीक्षाएं निरस्त करनी पड़ीं।
उन्होंने राजस्थान में कांग्रेस सरकार, पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार, तेलंगाना में बीआरएस सरकार और उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान हुई पेपर लीक की घटनाएं याद दिलाते पंजाब की ताजा पेपर लीक की घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि यदि यह सिद्धांत की लड़ाई है तो सरकार देखकर सिद्धांत बदल कैसे जाता है?

छात्रों की सालों की तपस्या का निर्णय तीन घंटे में क्यों: श्रीकांत शिंदे
जनप्रतिनिधि होने के साथ ही पेशे से डाक्टर शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने छात्रों की पीड़ा को संसद में उठाया। शिक्षा व्यवस्था और परीाा के सिस्टम में सुधार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि नीट एक परीक्षा है, एक दिन और एक मौका हम युवाओं को देते हैं। एनटीए एक एजेंसी है, जो निर्णय करती है कि सेंटर कहां होगा और परीक्षा किस दिन होगी।
छात्रों की सालों की तपस्या का हम तीन घंटे की परीक्षा और एक दिन में कैसे निर्णय कर सकते हैं। यदि किसी भी कारण से छात्र उस दिन परीक्षा न दे पाए तो पूरा साल बर्बाद होता है।
वह साल में एक ही बार परीक्षा क्यों दे। विदेशों में एक ही परीक्षा को साल में कई बार दे सकते हैं। ऐसा माडल यहां भी अपनाया जाना चाहिए।

परीक्षा के दबाव से छात्रों को निकालना बहुत जरूरी है। वहीं, विपक्ष से मुखातिब शिंदे ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद हमारी सरकार ने सिर्फ निंदा नहीं की, बल्कि सिस्टम की सफाई की।
हमारी सरकार में नैतिकता है, इसीलिए धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है, विपक्ष की वजह से नहीं दिया है। कांग्रेस पर कटाक्ष किया कि 37 दिन तक जंतर-मंतर इसलिए नहीं गए, क्योंकि डर था कि कहीं आम आदमी पार्टी जैसी एक और पार्टी तो खड़ी नहीं हो जाएगी।