विधानसभा चुनाव नतीजे: बंगाल-असम-पुडुचेरी में भाजपा का खिला कमल, केरल में कांग्रेस और तमिलनाडु में विजय की आंधी
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, तमिलनाडु में विजय की पार्टी ने उलटफेर क ...और पढ़ें
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विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे (जागरण)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों ने कई स्थापित राजनीतिक समीकरणों को उलट दिया है। बंगाल की राजनीति में बड़ा परिवर्तन हो गया, जहां भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पहली बार सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। पार्टी ने 200 के आंकड़े को भी पार कर लिया और ममता बनर्जी की पार्टी दो अंकों में सिमट गई।
वहीं तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय ने चमत्कारिक प्रदर्शन करते हुए सत्ता पर कब्जा जमाया है। केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ को स्पष्ट बढ़त मिली है, जबकि असम और पुडुचेरी में भाजपा ने अपनी सत्ता बरकरार रखी है।
इन चुनावों ने राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा की बढ़ती ताकत, क्षेत्रीय दलों की चुनौतियां और कांग्रेस की सीमित वापसी को स्पष्ट रूप से सामने रखा है। नतीजों ने वाम दलों को पूरी तरह हाशिये पर धकेल दिया है। अब पूरे देश से उनका सफाया हो गया है।
बंगाल में BJP ने किया 200 का आंकड़ा पार
बंगाल में 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने दो सौ का आंकड़ा पार कर अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। यह राज्य की राजनीति में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। लंबे समय से सत्ता में बनी तृणमूल कांग्रेस इस बार सौ के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सकी।
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सीमावर्ती, आदिवासी और औद्योगिक क्षेत्रों में भाजपा को व्यापक समर्थन मिला, जबकि तृणमूल शहरी और कुछ ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित रह गई। चुनाव प्रचार के दौरान ध्रुवीकरण, मतदाता सूची और ईवीएम सुरक्षा जैसे मुद्दों ने माहौल को तनावपूर्ण बनाए रखा। हालांकि हार के बाद ममता बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
तमिलनाडु में TVK ने किया बड़ा उलटफेर
तमिलनाडु में 234 सीटों के चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके ने सबसे बड़ा उलटफेर किया। बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े की ओर बढ़ते हुए टीवीके ने द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक द्विध्रुव को तोड़ दिया है।
डीएमके एवं एआईएडीएमके दोनों ही पीछे छूट गए। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सीट तक नहीं बचा सके। विजय की नई छवि, संतुलित बयानबाजी और लोकलुभावन वादों ने मतदाताओं को आकर्षित किया है। एमजीआर के बाद यह पहला अवसर है जब किसी फिल्मी व्यक्तित्व को इतनी व्यापक राजनीतिक स्वीकृति मिली है।
केरल में दस वर्षों के बाद सत्ता परिवर्तन के संकेत स्पष्ट हैं। कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने बहुमत की ओर बढ़त बनाई है। यहां लंबे समय से वामपंथी एलडीएफ की राजनीति मजबूत थी, जो इस बार पूरी तरह पिछड़ गया।
हालांकि नतीजे बता रहे हैं कि कांग्रेस को सुकून से सरकार बनाने-चलाने के लिए सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ेगा। यूडीएफ के बहुमत में आते ही वाम दलों का देश में आखिरी मजबूत गढ़ भी कमजोर पड़ गया है।
असम में BJP की हैट्रिक
असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। 126 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी ने सहयोगियों के साथ मिलकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लिया है।
हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में सरकार ने विकास कार्यों, कल्याणकारी योजनाओं और घुसपैठ के मुद्दे पर निर्णायक काम किया था, जिसके सामने कांग्रेस पूरी तरह पिछड़ गई और उसके प्रमुख नेता गौरव गोगोई को भी हार का सामना करना पड़ा।
पुडुचेरी में भी जीती भाजपा
भाजपा ने पूरे चुनाव के दौरान सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाए रखा, जिसका लाभ मिला।पुडुचेरी में भी राजग ने अपना प्रदर्शन दोहराते हुए सत्ता बरकरार रखी।
बंगाल में TMC की हार के प्रमुख कारण
- तीन बार की सत्ता विरोधी लहर
- तृणमूल के प्रति व्यापक जन-आक्रोश-भ्रष्टाचार
- ध्रुवीकरण व चुनावी हिंसा के आरोपों से नकारात्मक माहौल
तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन की हार के कारण
- डीएमके के शीर्ष नेताओं का सनातन विरोधी अनर्गल प्रलाप
- विजय की आक्रामक राजनीति से एंटी-इन्कम्बेंसी वोट बंटा
केरल में एलडीएफ-वाम मोर्चा की हार के कारण
- एलडीएफ के लगातार दो कार्यकाल के बाद तीव्र एंटी-इन्कम्बेंसी
- कांग्रेस-नीत यूडीएफ की बेहतर एकजुटता और रणनीतिक वोटिंग
असम में कांग्रेस की हार के कारण
- भाजपा की मजबूत गठबंधन रणनीति और घुसपैठ
- विकास मुद्दे-कांग्रेस नेतृत्व का संगठनात्मक बिखराव,
- कई नेताओं ने दल छोड़े
पुडुचेरी में कांग्रेस गठबंधन की हार के कारण
एनडीए का बेहतर चुनावी समन्वय और मजबूत रणनीति
विपक्षी गठबंधन में आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व में अस्थिरता
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