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    E20 पेट्रोल का इस्तेमाल शुरू करने से पहले किन-किन कंपनियों ने दिया ग्रीन सर्टिफिकेट?

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 06:19 PM (IST)

    केंद्र सरकार ने पुष्टि की कि वैज्ञानिक जांच और व्यापक परीक्षणों के बाद E20 ईंधन सुरक्षित पाया गया है, जो कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में सहायक है। ...और पढ़ें

    सरकार ने बताया- E20 ईंधन सुरक्षित (प्रतीकात्मक फोटो)

    सरकार ने बताया- E20 ईंधन सुरक्षित (प्रतीकात्मक फोटो)

    HighLights

    1. E20 पेट्रोल से वाहनों में असामान्य टूट-फूट का कोई सबूत नहीं।

    2. वैज्ञानिक जांच और नीति आयोग की मंजूरी के बाद आया E20 कार्यक्रम।

    3. सरकार का पेट्रोल पर निर्भरता कम करने का प्रयास।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। E20 मिक्स्ड पेट्रोल को लेकर हर तरफ बहस छिड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने आज गुरुवार, 30 जुलाई को लोकसभा में E20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम का बचाव करते हुए कहा, 'इस बात का कोई सबूत नहीं है कि E20 की वजह से गाड़ियों में कोई असामान्य टूट-फूट हुई हो।'

    न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने एक लिखित जवाब में कहा, 'इन स्टडीज से यह भी पता चला है कि पुरानी गाड़ियों की परफॉर्मेंस में कोई खास बदलाव नहीं आया और न ही E20 की वजह से उनमें कोई असामान्य टूट-फूट देखी गई।'

    कई बड़ी कंपनियों ने E20 पेट्रोल को दिया ग्रीन सर्टिफिकेट

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया, 'एथनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को वैज्ञानिक जांच और नीति आयोग से मंजूरी के बाद लाया गया।

    E20 पेट्रोल पर जांच की प्रक्रिया को ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और दूसरी तकनीकी संस्थाओं के साथ बातचीत के बाद अलग-अलग चरणों में शुरू किया गया था।

    राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने आगे कहा, 'ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों की तरफ से की गई व्यापक लैब टेस्टिंग और फील्ड ट्रायल से यह साबित हुआ है कि तय मानकों को पूरा करने पर E20 फ्यूल इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है।'

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    पेट्रोल पर निर्भरता कम करने का प्रयास

    सरकार ने कहा कि पेट्रोल की कीमतें बाजार के कारकों से तय होती हैं, जिनमें ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतें, एक्सचेंज रेट, ढुलाई का खर्च, टैक्स, इथेनॉल खरीदने की लागत और दूसरे ऑपरेशनल खर्च शामिल हैं।

    पेट्रोल पर हुए कुल नुकसान का अनुमान करीब 21,300 करोड़ रुपये लगाया गया, क्योंकि रिटेल फ्यूल की कीमतें बाजार से जुड़ी कीमतों से कम बनी रहीं।

    सुरेश गोपी ने कहा, 'पश्चिमी एशिया संकट के दौरान ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई, लेकिन भारत सरकार के सही समय पर किए गए उपायों, अलग-अलग जगहों से तेल खरीदने और देश में बने बायोफ्यूल के बढ़ते योगदान की वजह से ग्राहकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।'

    राज्य मंत्री ने कहा, 'पश्चिमी एशिया में चल रहे संकट के बीच कच्चे तेल के आयात पर भारत की भारी निर्भरता को देखते हुए एथनॉल ब्लेंडिंग का इस्तेमाल रणनीतिक रूप से बहुत अहम है।'

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