'शिक्षा के क्षेत्र में जातिवाद को बढ़ावा देती है मनुस्मृति', खरगे के बयान पर राज्यसभा में बवाल
राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने मनुस्मृति पर टिप्पणी की, जिससे सदन में हंगामा हो गया। ...और पढ़ें
HighLights
खरगे ने मनुस्मृति को शिक्षा में जातिवाद का जनक बताया
उनके बयान पर राज्यसभा में जोरदार हंगामा हुआ
सभापति ने खरगे की मनुस्मृति टिप्पणी रिकॉर्ड से हटाई
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एंटी पेपर लीक बिल को राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में पेश किया। इस बिल पर चर्चा की शुरुआत राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने की। खरगे ने कहा कि 12 साल में पहली बार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ।
सरकार ने पेपर लीक और प्रदर्शन के दौरान छात्रों की बात नहीं सुनी। बाद में जेपी नड्डा ने उन्हें बुलाया। ये पहले हो गया होता तो छात्रों को लाठी नहीं खानी पड़ती। खरगे ने इस दौरान मनुस्मृति को लेकर चर्चा की, जिसके चलते राज्यसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के हंगामे के कारण प्रश्नकाल नहीं चल सका, जिसके कारण राज्यसभा की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
मनुस्मृति को लेकर विवाद
राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की मनुस्मृति के बारे में की गई टिप्पणी ने विवाद को बढ़ाया। खरगे ने आरोप लगाया कि मनुस्मृति ने शिक्षा के क्षेत्र में जातिवाद को बढ़ावा दिया है, जिस पर राजकोषीय पीठ ने कड़ी आपत्ति जताई।
जैसे ही मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि मनुस्मृति शिक्षा के क्षेत्र में जातिवाद को बढ़ावा देती है, राज्यसभा में भारी हंगामा मच गया। विपक्षी सांसदों ने सदन में 'माफी माफी' के नारे लगाने शुरू कर दिए, वहीं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने खरगे द्वारा की गई टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।
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इस पर स्पीकर ने कहा कि खरगे की मनुस्मृति पर की गई टिप्पणियां रिकॉर्ड से हटा दी जाएंगी।
शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं- खरगे
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई। सरकार क्या कर रही थी। क्या एजेंसियां सो रही थीं। शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है। शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है। बजट में छह फीसदी भागीदारी शिक्षा बजट की होनी चाहिए, लेकिन तीन फीसदी से भी कम है।
खरगे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा क आपका कहना है कि विश्वविद्यालयों में अच्छे शिक्षक, अच्छे वीसी आएं। लेकिन आप जो सिलेबस बदल रहे हैं, उसमें ये भी आ रहा है- शूद्र के वेद पाठ सुनने पर शीशे और जस्ते से उसके कान भर दिए जाए।
वेद मंत्र का उच्चारण करने पर उसकी जीभ काट ली जाए। ये आरएसएस सिलेबस है। ऐसे विचारों की निंदा करता हूं। ऐसी सामग्री को सिलेबस से हटाया जाए। यूनिवर्सिटी में आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं। यूपीए सरकार ने सबको समान शिक्षा के लिए शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया।
मनुस्मृति का ओरिजिनल टेक्स्ट ऑथेंटिकेट करें
नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता ने जो कहा है, वह मेरी जानकारी में तथ्यों से परे है। मनुस्मृति का ओरिजिनल टेक्स्ट ऑथेंटिकेट करें। सुधांशु त्रिवेदी ने बोलना शुरू ही किया था कि सभापति ने उनको टोका।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के एक पूर्व जज विलियम जोंस के साथ ही बाबासाहब डॉक्टर आंबेडकर की किताब को कोट किया और कई किताबों का संदर्भ दिया और कहा कि इसीलिए कह रहा हूं कि ये ऑथेंटिकेट करें।
प्रमोद तिवारी ने एक किताब दिखाते हुए कहा कि यह किताब इनके कार्यकाल में छपी है, चल रही है, प्रतिबंधित नहीं है। अगर ये कह रहे हैं, दिखा रहे हैं, तो गलती इनकी है। 12 साल से इनकी सरकार है। जेपी नड्डा ने कहा कि ब्रिटिश टाइम से पहले का ओरिजिनल टेक्स्ट लाइए. नड्डा ने कहा कि ऐसे बयानों से अशांति फैलती है। इस पर सभापति ने खड़गे की ओर से मनुस्मृति वाला बयान एक्सपंज करने का एलान कर दिया।
अमित शाह साहब दिख ही नहीं रहे- खरगे
खरगे ने कहा- अमित शाह साहब दिख ही नहीं रहे। छोटी-छोटी बातों पर आकर अपनी बात रखते हैं, इस तरफ क्यों नहीं आते, मुझे मालूम नहीं। पीएम भी मुंह नहीं खोल रहे। आप गृह मंत्री हो, कानून-व्यवस्था देखते हो, दिल्ली में इतनी गड़बड़ी पर भी मुंह नहीं खोल रहे हो। क्या स्टिच लगा लिया है क्या मुंह पर। नहीं, मैं नहीं आऊंगा। आपको जो सबक सिखाया है छात्रों ने, वह फिर आकर सबक सिखा देंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा- 20 जुलाई को छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। संसद की ओर आ रहे थे, संवाद चाहते थे, लेकिन उन्हें लाठीचार्ज मिला। पैलेट गन, आंसू गैस, वॉटर कैनन, करंट, कील वाली लाठी और मेट्रो इंटरनेट बंद किए। इससे छात्र उग्र हो गए।