कफ सीरप से बच्चों की मौत और बैंक फ्रॉड जैसे कई मामले, लेकिन CCPA बैठा रहा शांत; 6 साल में नहीं किया एक भी मुकदमा
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) का गठन उपभोक्ताओं के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए हुआ था, लेकिन RTI रिपोर्ट के मुताबिक, बीते छह सालों में ...और पढ़ें

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने छह साल में नहीं किया मुकदमा
HighLights
CCPA ने 6 साल में एक भी सामूहिक मुकदमा नहीं किया।
RTI रिपोर्ट: 2022-25 के दौरान कोई सामूहिक मामला नहीं।
CCPA सचिव ने 514 नोटिस जारी करने की जानकारी दी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) का गठन तो हुआ, लेकिन CCPA ने बीते छह सालों में कोई मुकदमा नहीं किया है।
आयोग के सामने कफ सीरप से बच्चों की मौत से लेकर बैंक फ्रॉड जैसे कई मामले सामने आए, लेकिन आयोग के पास क्लास एक्शन का अधिकार होते हुए भी कोई एक्शन नहीं लिया गया।
RTI की रिपोर्ट में खुलासा
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट को RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने 2022-25 के दौरान उपभोक्ताओं की ओर से एक साथ कोई मामला दायर नहीं किया।
हालांकि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत CCPA को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
इस अधिकार के तहत समान प्रकृति के मामलों में बड़ी संख्या में प्रभावित उपभोक्ताओं की ओर से सामूहिक कार्रवाई करना था, जिससे हर उपभोक्ता को अलग-अलग केस न लड़ना पड़े।
कहा जाए तो CCPA के एक्शन न लेने के चलते एक जैसे मामलों में भी उपभोक्ताओं को अलग-अलग मुकदमे लड़ने पड़े, जिसके चलते आयोग पर बोझ बढ़ता चला गया। जबकि CCPA का गठन एक जैसे मामलों का निपटारा एक साथ करने के लिए किया गया था।
RTI की रिपोर्ट सामने आने के बाद सीसीपीए की सचिव निधि खरे का बयान भी सामने आया। निधि खरे का कहना है कि प्राधिकरण अब तक 514 नोटिस जारी कर चुका है, 169 अंतिम आदेश पारित किए हैं और 3.43 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। सीसीपीए की सचिव ने कहा, जरूरत पड़ने पर सभी शक्तियों का उपयोग किया जाएगा।