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    अभिषेक बनर्जी के दफ्तर पर नहीं होगी बुलडोजर कार्रवाई, कलकत्ता हाई कोर्ट ने दी राहत

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 03:54 PM (GMT+05:30)

    कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के आमतला स्थित दफ्तर को और तोड़े जाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले में अगले निर्देश तक घटनास्थल पर 'यथास ...और पढ़ें

    आमतला स्थित दफ्तर को और तोड़े जाने पर फिलहाल रोक (फोटो: पीटीआई)

    आमतला स्थित दफ्तर को और तोड़े जाने पर फिलहाल रोक (फोटो: पीटीआई)

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    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने रविवार, छुट्टी के दिन विशेष अदालत बैठाकर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के आमतला स्थित दफ्तर को और तोड़े जाने पर फिलहाल रोक लगा दी है।

    हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि मामले में अगले निर्देश तक घटनास्थल पर 'यथास्थिति' बरकरार रखी जाए। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि शनिवार से लेकर अब तक प्रशासन द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई में वह फिलहाल कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहा है।

    आमतल्ला स्थित पांच मंजिला इमारत के अवैध हिस्से को गिराने के लिए शनिवार को प्रशासन ने भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ बड़ी कार्रवाई शुरू की थी। रविवार को भी तोड़फोड़ जारी रही, जिसके खिलाफ 'लिप्स एंड बाउंड्स' कंपनी (जिसके नाम पर जमीन है और अभिषेक बनर्जी इसके एक निदेशक हैं) के वकीलों ने ईमेल के जरिए हाई कोर्ट से तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई।

    दोपहर करीब डेढ़ बजे जस्टिस राजा बसु चौधरी की पीठ में इस हाई-प्रोफाइल मामले की आपात सुनवाई शुरू हुई। जैसे ही कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया, दोपहर में दफ्तर पर चल रहा बुलडोजर थम गया।

    कोर्ट में सवाल, 'मालिक को नोटिस क्यों नहीं?'

    सुनवाई के दौरान कंपनी के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्त ने दलील दी कि प्रशासन ने बिना किसी उचित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए यह कार्रवाई की है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जमीन 'लिप्स एंड बाउंड्स' कंपनी की है, लेकिन भवन मालिक को कोई नोटिस नहीं दिया गया।

    इसके बजाय केवल कंपनी के एक निदेशक (अमित बनर्जी) को नोटिस भेजा गया। सुनवाई के लिए मात्र सात दिनों का अपर्याप्त समय दिया गया और शिकायत की कापी या डिमोलिशन आर्डर (तोड़ने का आदेश) तक मुहैया नहीं कराया गया। वकील ने इसे मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया।

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    दूसरी तरफ, सरकारी वकील ने इस निर्माण को पूरी तरह अवैध बताते हुए प्रशासनिक कार्रवाई को सही ठहराया। दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन का दावा है कि एक स्थानीय शिकायतकर्ता सुशांत मंडल की अर्जी पर नियम के तहत ही नोटिस भेजे गए थे, लेकिन तृणमूल या कंपनी की तरफ से कोई भी निर्धारित तिथि (15 जुलाई) को उपस्थित नहीं हुआ।

    हाई-वोल्टेज ड्रामा और अभिषेक का पलटवार

    शनिवार सुबह जब भारी पुलिस और केंद्रीय बलों की मौजूदगी में बुलडोजर आमतला पहुंचा, तो वहां का नजारा किसी फिल्मी सीन जैसा था। सबसे पहले दफ्तर के बाहर बने एक आलीशान और वातानुकूलित अस्थायी शेड को ढहाया गया। इसके बाद मुख्य इमारत का ताला तोड़कर पुलिस अंदर घुसी। इस दौरान कुछ स्थानीय लोग भी अंदर घुस गए और तोड़फोड़ की, जिन्हें बाद में पुलिस ने खदेड़ दिया।

    इस पूरी कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए सांसद अभिषेक बनर्जी ने प्रशासन के दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रतिनिधि सुनवाई में शामिल हुए थे और उन्होंने शिकायत की कापी मांगी थी, जिसे प्रशासन दे नहीं पाया। महज दो दिनों के भीतर बुलडोजर चलाकर इमारत की पहली और दूसरी मंजिल को लगभग जमींदोज कर दिया गया।

    बनर्जी ने दावा किया कि पूरी इमारत वैध नक्शे और नियमों के तहत ही बनाई गई थी। फिलहाल, हाई कोर्ट के इस फैसले से अभिषेक को आंशिक राहत जरूर मिली है, लेकिन इस मामले पर अब राजनीतिक और कानूनी लड़ाई और तेज होना तय है।

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