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    JPC के पास भेजा जाएगा FCRA बिल? विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ले सकती है फैसला

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 09:26 PM (IST)

    केंद्र सरकार FCRA बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज सकती है। वहीं, कांग्रेस और टीएमसी ने इस बिल को वापस लेने की मांग की है। ...और पढ़ें

    FCRA बिल को JPC को भेज सकती है सरकार। (संसद टीवी)

    FCRA बिल को JPC को भेज सकती है सरकार। (संसद टीवी)

    HighLights

    1. FCRA बिल संयुक्त संसदीय समिति को भेजने पर विचार।

    2. केंद्र सरकार के सूत्रों से मिली अहम जानकारी।

    3. कांग्रेस और टीएमसी ने बिल वापसी की मांग की।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विदेशी अनुदान विनियमन कानून (FCRA) संशोधन विधेयक के प्रविधानों के खिलाफ देश के भीतर और बाहर कुछ संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से जताई जा रही आशंकाओं को देखते हुए सरकार इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज सकती है।

    संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इसके स्पष्ट संकेत दिए। उनके अनुसार एफसीआरए संशोधन विधेयक पर विपक्षी दलों की अलग-अलग राय है, उनसे व्यापक सलाह मशविरा कर सरकार इसपर फैसला करेगी। परिसीमन जैसे विधेयक पर भविष्य में कुछ अतिरिक्त दलों की मदद को देखते हुए भी यह फैसला अहम हो सकता है।

    किरेन रिजिजू ने विधेयक पर विपक्षी दलों की राय ली

    उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों से एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर राय पूछी थी। कांग्रेस ने इसे इन संशोधनों की जरूर पर सवाल उठाते हुए पूरे विधेयक को वापस लेने को कहा।

    वहीं तृणमूल कांग्रेस ने शुरूआत में संशोधन के प्रविधानों पर एक राय बनाने की जरूरत बताने के बाद अंतत पूरे विधेयक वापस लेने को कह दिया। वहीं बीजू जनता दल (BJD) ने पूरे विधेयक वापस लेने के बजाय इसे प्रविधानों पर विस्तृत चर्चा करने की जरूरत बताते हुए इसे जेपीसी में भेजने की जरूरत बताई। सपा का प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं था।

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    FCRA विधेयक को पास कराने के लिए सामान्य बहुमत की जरूरत

    दरअसल एफसीआरए विधेयक को पास कराने के लिए सामान्य बहुमत की जरूरत है, जो लोकसभा और राज्यसङा दोनों सदनों में मौजूद है। राजग के किसी घटक दल ने विधेयक के प्रविधानों पर सवाल नहीं उठाया है। लेकिन बहुमत होने के बावजूद सरकार इसे बिना चर्चा के पास कराना नहीं चाहती है। इसका देश और विदेश में नकारात्मक संदेश जाएगा।

    इसे देखते हुए सरकार ने विधेयक पर सभी विपक्षी दलों से विचार-विमर्श करने का फैसला किया है। किरेन रिजीजू ने कहा कि एक बार सबकी राय मिल जाने के बाद सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

    ध्यान रहे कि द्रमुक, वाईएसआर, टीडीपी जैसे कई दलों ने भी आशंका व्यक्त की है। यूं तो सभी को समझाया गया है कि एफसीआरए विदेशी चंदा को सही तरह से आने से नहीं रोकेगा। फिर भी जेपीसी में व्यापक चर्चा के बाद सहमति बनाने का दूसरा फायदा यह भी हो सकता है कि परिसीमन जैसे विधेयक पर वह पूरे दिल के साथ समर्थन करें।

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