FCRA संशोधन बिल पर धीमी चाल चलना चाहती है सरकार, परिसीमन के लिए DMK और शरद गुट को साधने की कोशिश
सरकार ने मानसून सत्र के सोमवार के एजेंडे से FCRA संशोधन विधेयक को हटा दिया है, जिससे इसके पारित होने में देरी की अटकलें तेज हो गई हैं। ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन सोमवार के लिए लोकसभा के एजेंडे में फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट (FCRA) बिल 2026 शामिल नहीं है। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि केंद्र सरकार इस विवादित विधेयक को पास कराने में जल्दबाजी नहीं दिखा रही है।
माना जा रहा है कि सरकार डीएमके और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) जैसी विपक्षी पार्टियों को साधने की कोशिश में है, जो इसके प्रावधानों का विरोध कर रही हैं और जिन्हें केंद्र सरकार भविष्य में परिसीमन अभ्यास के लिए संभावित समर्थकों के रूप में देख रही है।
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में मिल सकती है स्पष्टता
सूत्रों के अनुसार, सोमवार को होने वाली लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। 13 अगस्त को समाप्त हो रहे मानसून सत्र के शेष चार दिनों में अगर इस विधेयक को पारित कराना है, तो चर्चा की समय-सीमा तय करनी होगी।
हालांकि, सोमवार के आधिकारिक एजेंडे में चार नए विधेयकों को पेश करने का उल्लेख तो है, लेकिन इसमें एफसीआरए संशोधन विधेयक का नाम नहीं है।
यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक समूहों विशेषकर ईसाई संगठनों के कड़े विरोध के कारण इस पर अब तक चर्चा नहीं हो पाई है।
विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले प्रमुख ईसाई निकायों ने प्रस्तावित संशोधनों का विरोध करते हुए कहा है कि यह उनके सामाजिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए बड़ा खतरा है। उनका तर्क है कि इन संशोधनों के तहत एफसीआरए लाइसेंस रद होने या नवीनीकृत न होने की स्थिति में सरकार को उनकी संपत्तियां जब्त करने का अधिकार मिल जाएगा।
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परिसीमन और महिला आरक्षण पर समर्थन जुटाने की रणनीति
भाजपा के लिए राजनीतिक समीकरण तब और जटिल हो गए, जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने विभिन्न चर्चों के प्रतिनिधिमंडल की मांग का समर्थन किया। इस प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर विधेयक को वापस लेने या इसे समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का अनुरोध किया था।
वर्ष 2029 से लागू होने वाले महिला आरक्षण कानून और उससे पहले प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास के लिए सरकार द्रमुक जैसी मजबूत क्षेत्रीय पार्टी को अपने साथ जोड़ना चाहती है।
कुछ सांसदों का मानना है कि सरकार एफसीआरए विधेयक को जबरन लाकर द्रमुक को असहज या रक्षात्मक स्थिति में नहीं डालना चाहती। वहीं, राकांपा (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी इस विधेयक का खुलकर विरोध किया है।
12 अगस्त को चर्चा होने की संभावना
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अपने राज्य के चर्च निकायों के प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद मीडिया को बताया था कि उन्हें 12 अगस्त को इस विधेयक पर चर्चा होने की बात कही गई है।
संसद में विपक्ष के हंगामे के कारण बने गतिरोध के बीच सरकार इस विधेयक पर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय पूरी बहस कराना चाहती है, ताकि गृह मंत्रालय विधेयक से जुड़े तमाम सवालों और आलोचनाओं का बिंदुवार जवाब दे सके।