यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 19, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
NSG: ड्रैगन को साधने के लिए विदेश सचिव ने किया था चीन का दौरा
एनएसजी के मुद्दे पर अमेरिका और रूस जैसे बड़े देशों के समर्थन के बाद अब भारत की तरफ से चीन को मनाने की कोशिशें जारी हैं।

नई दिल्ली (जेएनएन)। आने वाले शुक्रवार को सियोल में होने वाले परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की बैठक से पहले भारत की तरफ से चीन को मनाने की कोशिशों का दौर जारी है। इसके लिए कूटनितिक स्तर पर तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। इन्ही प्रयासों के तहत विदेश सचिव एस जयशंकर ने इसी हफ्ते चीन का दौरा किया था।
कहा जा रहा है कि विदेश सचिव की चीन की यात्रा का उद्देश्य एनएसजी में भारत की सदस्यता के लिए समर्थन हासिल करना था। चीन लगातार एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध कर रहा है। जबकि, एनएसजी के मुद्दे पर अमेरिका समर्थन के बाद अब रूस भी भारत के पक्ष में आ खड़ा हुआ है।
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विदेश सचिव एस जयशंकर ने 16 से 17 जून तक बीजिंग कौ दौरा किया था जहां उन्होंने अपने चीनी समकक्ष से द्विपक्षीय वार्ता की। इस बात की पुष्टि करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा है कि विदेश सचिव एस जयशंकर ने 16-17 जून को बीजिंग का दौरा किया था जहां उन्होंने अपने चीनी समकक्ष से द्वपक्षीय वार्ता की थी।
विदेश मंत्रालय का कहना है कि बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत की एनएसजी सदस्यता सहित सभी बड़े मुद्दों पर बातचीत की।
In the meeting between FS S Jaishankar and his Chinese counterpart, all major issues including India's NSG membership were discussed: MEA
— ANI (@ANI_news) June 19, 2016
एलीट एनएसजी में प्रवेश को लेकर भारत के आक्रामक दावे के बीच कुछ दिन पहले ही विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा था कि एक मजबूत भारतीय परमाणु उद्योग परमाणु शक्ति को वैश्विक स्तर पर ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना सकता है।

