बच्चों को बीमार बना रहा स्मार्टफोन, राज्यसभा में उठी कानूनी चेतावनी की मांग
राज्यसभा में 3 जनवरी को बच्चों में स्मार्टफोन की लत और बढ़ते स्क्रीनटाइम पर जदयू सांसद संजय कुमार झा ने ...और पढ़ें

राज्य सभा में बच्चों में स्मार्टफोन की लत पर उठाए गए सवाल (जागरण)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बच्चों में स्मार्टफोन की लत और बढ़ते स्क्रीनटाइम के नकारात्मक प्रभाव का मुद्दा आज मंगलवार, 3 जनवरी को राज्यसभा में गूंजा।
जनता जल (यूनाइटेड) के सांसद संजय कुमार झा ने विभिन्न अध्ययन और रिपोर्ट का हवाला देते हुए इंटरनेट मीडिया के नकारात्मक कंटेंट और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को लेकर चिंता जताते हुए सदन में इस मुद्दे पर चर्चा की आवश्यकता जताई।
स्मार्टफोन के लिए भी होनी चाहिए चेतावनी
संजय कुमार झा ने सुझाव के रूप में प्रश्न किया, 'क्या जिस तरह तंबाकू उत्पादों पर उनके उपयोग को लेकर वैधानिक चेतावनी होती है, वैसी ही चेतावनी स्मार्टफोन के आयु आधारित उपयोग के संबंध में अनिवार्य नहीं होनी चाहिए।'
शून्यकाल में इस गंभीर विषय को उठाते हुए संजय कुमार झा ने सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया का ताजा उदाहरण दिया। जदयू सांसद ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में 2025 में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के इंटरनेट मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध का कानून बनाया गया है।'
संजय कुमार झा ने बताया, 'यह कदम उस अध्ययन के बाद उठाया गया, जिसमें सामने आया कि वहां 10 से 15 वर्ष आयु के 96 प्रतिशत बच्चे इंटरनेट मीडिया का उपयोग करते हैं, जिसका कंटेंट काफी हानिकारक है।
स्मार्टफोन से बच्चों को हो रही स्वास्थ्य समस्याएं
जदयू सांसद ने दावा किया कि भारत में लोकल सर्किल स्टडी में पाया गया कि 14 से 16 वर्ष की आयु के 82 प्रतिशत बच्चे स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं। उनमें से मात्र 57 प्रतिशत बच्चे ही शिक्षा के लिए उपयोग करते हैं।
संजय कुमार झा ने आगे बताया, 'इनमें से 76 प्रतिशत बच्चे सोशल मीडिया पर हैं। उनमें से 11 से 37 प्रतिशत बच्चों में शारीरिक विकास में कमी, नींद में गड़बड़ी, कम उम्र में अपशब्दों का प्रयोग, ध्यान केंद्रित करने में कमी और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देखी गई हैं।'
डिजिटल कंटेंट की हो निगरानी
झा ने आगे कहा, 'सोशल मीडिया पर जिस तरह का कंटेंट उपलब्ध है, वह बच्चों के विकास पर गलत प्रभाव डाल रहा है।' सुझाव दिया कि स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को स्क्रीन टाइम के साथ ही डिजिटल कंटेंट की निगरानी भी करनी चाहिए।
सांसद झा ने कहा कि पांच राज्यों के तीन हजार से अधिक अभिभावकों के सर्वे के आधार पर रिपोर्ट प्रकाशित हुई है कि दो से पांच साल तक के बच्चों का स्क्रीन टाइम भी तेजी से बढ़ रहा है।
झा ने कहा कि सदन को इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए कि क्या स्मार्टफोन के उपयोग और स्क्रीनटाइम को लेकर भी तंबाकू उत्पादों की तरह ही आयु आधारित उपयोग के संबंध में वैधानिक चेतावनी अनिवार्य होनी चाहिए? उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण में भी डिजिटल लत के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव का उल्लेख किया।
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