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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 23, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Chandrayaan 3 First Image: लैंडर विक्रम ने कराया चांद का दीदार, लैंडिंग के बाद आई चंद्रमा की पहली तस्वीर

    By Ashisha Singh RajputEdited By: Ashisha Singh Rajput
    Updated: Wed, 23 Aug 2023 10:30 PM (IST)

    चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही भारत ने इतिहास रच दिया है। लैंडर सही तरीके से अपना काम कर रहा है। भारतीय यान ने चांद को चुमने के बाद इस ...और पढ़ें

    इसरो ने चंद्रमा की सतह से भेजी गई पांच तस्वीरों को ट्वीट किया।
    इसरो ने चंद्रमा की सतह से भेजी गई पांच तस्वीरों को ट्वीट किया।

    HighLights

    1. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक लैंडिंग की है।
    2. पीएम मोदी ने इसरो सहित पूरे देशवासियों को दी बधाई
    3. चांद के साउथ पोल पर चंद्रयान उतारने वाला भारत पूरी दुनिया में पहला देश बन गया है।

    नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। Chandrayaan 3 First Image of Moon: चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही भारत ने इतिहास रच दिया है। लैंडर सही तरीके से अपना काम कर रहा है। भारतीय यान ने चांद को चुमने के बाद इसकी कुछ तस्वीरें भेजी हैं।

    चंद्रमा की सतह से सामने आई पांच तस्वीरें

    इसरो ने चंद्रमा की सतह से भेजी गई पांच तस्वीरों को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया। आपको बता दें कि यह तस्वीरें लैंडर विक्रम के हॉरिजोन्टल वेलोसिटी कैमरा से ली गई हैं। लैंडर द्वारा भेजी गई एक फोटो में वो लैंडिंग साइट दिख रही है, जहां विक्रम चांद पर उतरा है।

    तस्वीर में नजर आया लैंडर विक्रम का पैर

    इसरो द्वारा जारी की गई तस्वीर में चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट का एक हिस्सा दिखाया गया है। इसमें लैंडर विक्रम का एक पैर और उसके साथ की परछाई भी दिखाई दे रही है। वहीं, इसरो ने बताया कि इसके लिए चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर अपेक्षाकृत समतल क्षेत्र चुना।

    साउथ पोल पर चंद्रयान उतारने वाला भारत बना पहला देश

    आपको बता दें कि चांद के साउथ पोल पर चंद्रयान उतारने वाला भारत पूरी दुनिया में पहला देश बन गया है। अब तक किसी भी देश ने ऐसा नहीं किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग पर इसरो और देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इससे पहले कोई भी देश वहां (चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव) तक नहीं पहुंचा है। हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत से हम वहां तक पहुंचे हैं।

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