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    ड्रेस कोड विवाद पर लेंसकार्ट की सफाई, नई गाइडलाइन जारी कर मांगी माफी; यूजर्स बोले- 'भरोसा टूट गया'

    Updated: Sun, 19 Apr 2026 03:53 PM (IST)

    लेंसकार्ट ने ड्रेस कोड विवाद पर नई स्टाइल गाइड जारी कर माफी मांगी है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक पहन सकते हैं। हाला ...और पढ़ें

    ड्रेस कोड विवाद पर लेंसकार्ट की सफाई (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ड्रेस कोड को लेकर विवाद में घिरी कंपनी लेंसकार्ट ने अब नई स्टाइल गाइड जारी कर माफी मांगी है। कंपनी ने साफ किया है कि कर्मचारी अपने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ काम कर सकते हैं। हालांकि, इस कदम के बावजूद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

    लेंसकार्ट ने बयान जारी कर कहा कि उसने ग्राहकों और लोगों की चिंताओं को ध्यान से सुना है। कंपनी ने माना कि अगर पहले की किसी जानकारी से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसे खेद है। साथ ही यह भी कहा गया कि कंपनी भारत में बनी है और यहां के लोगों के लिए काम करती है, इसलिए कर्मचारियों को अपनी पहचान छोड़ने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

    नई गाइडलाइन में साफ तौर पर कहा गया है कि कर्मचारी बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक पहन सकते हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि आगे की नीतियां और ट्रेनिंग इसी सोच को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी।

    क्या है नई ड्रेस कोड गाइडलाइन?

    नई गाइडलाइन के मुताबिक कर्मचारियों को कंपनी की टी-शर्ट, साधारण गहरे नीले रंग की जींस और बंद जूते पहनना होगा। इसके साथ ही सांस्कृतिक और धार्मिक चीजें जैसे कड़ा, चूड़ियां, मंगलसूत्र, कलावा पहनने की अनुमति दी गई है। छोटे झुमके, नथ, अंगूठी और चेन भी पहन सकते हैं।

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    गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि बिंदी, तिलक और सिंदूर जैसे धार्मिक चिन्ह पूरी तरह से मान्य हैं। वहीं पगड़ी और हिजाब जैसे सिर ढकने वाले कपड़े भी पहनने की अनुमति है, बशर्ते वे साफ-सुथरे हों और काम में बाधा न डालें।

    कंपनी ने यह भी कहा कि वह प्रोफेशनल माहौल, साफ-सफाई और सभी कर्मचारियों के साथ बराबरी का व्यवहार बनाए रखेगी। कर्मचारियों को यह भरोसा भी दिया गया है कि वे बिना डर के अपनी शिकायत एचआर से कर सकते हैं।

    सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

    नई गाइडलाइन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने कंपनी पर भरोसा खोने की बात कही। कुछ लोगों ने कंपनी के खिलाफ विरोध जताने की भी अपील की।

    एक यूजर ने लिखा कि कंपनी ने नीति बदल दी, लेकिन यह बदलाव पकड़े जाने के बाद किया गया, इसलिए भरोसा टूट गया है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि अगर कंपनी भारत की है तो पहले ऐसी पाबंदियां क्यों थीं। एक अन्य यूजर ने कंपनी के सीईओ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले इस नीति को पुराना बताया गया, लेकिन अब माफी मांगी जा रही है, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हुआ।

    कैसे बढ़ा विवाद?

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर कंपनी के कथित ड्रेस कोड को लेकर सवाल उठे। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि कंपनी कुछ धार्मिक प्रतीकों की अनुमति देती है, जबकि कुछ पर रोक लगाती है। इसके बाद कंपनी के सीईओ पीयूष बंसल ने कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और वर्तमान नीति को नहीं दर्शाता। लेकिन इसी बीच कंपनी के पोंगल से जुड़े एक विज्ञापन को लेकर भी आलोचना शुरू हो गई।

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