जुलाई में ही सुस्त पड़ा मानसून, अगस्त-सितंबर में क्या होगा? 1901 के बाद सबसे कम दर्ज हुई बारिश
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगस्त-सितंबर में औसत से कम वर्षा का अनुमान लगाया है, जबकि जुलाई में अच्छी बारिश से मानसून का घाटा कम हुआ है। ...और पढ़ें

अगस्त-सितंबर में औसत से कम वर्षा का अनुमान

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मानसून के पहले हिस्से में जुलाई के दौरान अच्छी वर्षा से राहत मिलने के बाद अब दूसरे चरण में इसकी रफ्तार कुछ कमजोर पड़ सकती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शुक्रवार को जारी मासिक पूर्वानुमान में कहा कि अगस्त से सितंबर के दौरान देश में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है।
इस अवधि में पूरे देश में वर्षा, दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 94 प्रतिशत से कम रह सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में कम वर्षा होगी।
अगस्त-सितंबर में औसत से कम वर्षा का अनुमान
मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है, लेकिन मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी हिस्सों तथा पूर्वोत्तर व पूर्वी राज्यों के कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।
यानी वर्षा का वितरण पूरे देश में एक जैसा नहीं रहेगा। अगस्त महीने के लिए देश में वर्षा का दीर्घावधि औसत 254.9 मिलीमीटर है।
जून-जुलाई में 13 प्रतिशत कम बारिश
फिलहाल जून-जुलाई मिलाकर देश में वर्षा सामान्य से 13 प्रतिशत कम हुई है। जून के अंत तक यह कमी 35.4 प्रतिशत थी। जुलाई में अच्छी वर्षा होने से यह अंतर काफी घट गया है।
जुलाई में देशभर में औसतन 283.3 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो सामान्य 280.5 मिलीमीटर से थोड़ी अधिक रही। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई में अच्छी वर्षा के पीछे दो प्रमुख कारण रहे।
पहला, बंगाल की खाड़ी में चार कम दबाव के क्षेत्र बने, जिनमें से दो गहरे होकर डिप्रेशन में बदल गए। सामान्य तौर पर जुलाई में कम दबाव प्रणाली करीब 13.5 दिन सक्रिय रहती है, जबकि इस बार यह अवधि बढ़कर 24 दिन रही।
अगस्त-सितंबर में क्या होगा?
दूसरा, महीने की शुरुआत में मानसूनी गतिविधियां मजबूत हुईं और देश के कई हिस्सों में अच्छी वर्षा हुई। जुलाई के दौरान अत्यधिक भारी वर्षा की घटनाओं में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इस वर्ष जुलाई में 204.5 मिलीमीटर से अधिक वर्षा वाली 269 घटनाएं दर्ज हुईं, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं। सबसे ज्यादा ऐसी घटनाएं ओडिशा, गुजरात और महाराष्ट्र में हुईं।
1901 के बाद सबसे अधिक तापमान
दूसरी ओर, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में जुलाई के दौरान वर्षा काफी कम रही। इस क्षेत्र में जुलाई की वर्षा वर्ष 1901 के बाद दसवीं सबसे कम रही। कम वर्षा के कारण यहां जुलाई का औसत न्यूनतम तापमान भी 1901 के बाद सबसे अधिक दर्ज किया गया।
खबरें और भी
मौसम विभाग का आकलन है कि मानसून का दूसरा चरण पहले की तुलना में कमजोर रह सकता है, लेकिन बीच-बीच में कुछ क्षेत्रों में अच्छी वर्षा के दौर भी देखने को मिलेंगे। इसलिए अगस्त और सितंबर में पूरे देश में एक जैसी मानसूनी स्थिति रहने की संभावना नहीं है।