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नेपाल महाविनाश: लापता भारतीयों में अधिकांश कैलास मानसरोवर के तीर्थयात्री; तलाश में जुटीं सेना और रेस्क्यू टीमें

By Jaiprakash RanjanEdited By: Garima Singh
Published: Thu, 27 Aug 2026 09:28 PM (IST)Updated: Fri, 28 Aug 2026 06:56 AM (IST)

नेपाल के रसुवा में आई भीषण बाढ़ में 290 भारतीय नागरिक लापता हो गए हैं, जिनमें कैलाश-मानसरोवर के तीर्थयात्री और त्रिशूल पावर परियोजना के कर्मचारी शामिल हैं।

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जयप्रकाश रंजन,नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ में मची तबाही में सैकड़ों भारतीय नागरिक भी लापता हैं। 290 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है।

इनमें त्रिशूल पावर परियोजना में कार्यरत 73 भारतीय कामगार भी शामिल हैं। लापता भारतीयों में से अधिकांश कैलाश-मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री थे।

भारत ने इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़े होने का संकल्प दोहराया है। राहत पहुंचाने का काम विदेश मंत्री एस. जयशंकर की निगरानी में चल रहा है।

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विदेश मंत्री संभाल रहे ऑपरेशन का मोर्चा 

जयशंकर ने विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय की टीम और काठमांडू व बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूतों के साथ समीक्षा बैठक की है ताकि बचाव कार्य समन्वित तरीके से हो सके।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी भारतीयों की स्थिति और कुशलता का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर आपरेटरों और परियोजना अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। भारत नेपाली पक्ष के साथ इस मामले और राहत प्रयासों दोनों पर करीब से काम कर रहा है। राहत सामग्री भेजी गई है।

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हालांकि समस्या इस मदद को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने व आपदा से प्रभावित केंद्र तक पहुंच बनाने की है। भारतीय विदेश मंत्रालय तक जो थोड़ी बहुत सूचनाएं ‘ग्राउंड जीरो’ से लगातार आ रही हैं, उसके मुताबिक स्थानीय स्तर पर (रसुवा, नुवाकोट, बिदुर आदि) मलबा हटाना सबसे जरूरी व प्राथमिकता वाला काम होगा।

त्रिशुली बाजार व बिदुर के पास नदी के आसपास बसे गांव, बाजार व दुकानें कीचड़ में दबे हुए हैं। नेपाल सरकार के पास इन सभी इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए न तो जरूरी उपकरण है और न ही मानव बल। बड़े पैमाने पर राहत चलाने का काम अभी एक-दो दिन बाद ही शुरू हो पाएगा।

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290 भारतीय नागरिकों से अभी तक नहीं हुआ संपर्क 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने राहत कार्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया -' वर्तमान जानकारी के अनुसार 288 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 73 भारतीय शामिल हैं।

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास परियोजना प्रमुख से संपर्क में है ताकि इन लोगों के बारे में और जानकारी मिल सके। उस क्षेत्र में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है, इसलिए जमीन पर लोगों से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है।'

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के 37 और 49 नागरिकों के दो अलग-अलग समूह कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल्स के जरिए गए थे।

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रसुवा जिले के तिमुरे में बंगाल के 32 भारतीय सम्राट ट्रैवल्स के साथ गए थे, जिनकी कोई सूचना नहीं है। ये लोग आपदा के समय वहीं पर थे। विभिन्न राज्यों के 61 भारतीय रिचा टूर्स के जरिए गए थे, जिनमें केरल के 33 भारतीयों का एक समूह भी इनमें शामिल है।

ये पांच प्रमुख समूह मिलकर करीब 288 लोगों की संख्या बनाते हैं। एक अच्छी बात यह है कि दोपहर एक बजे तक तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों के एक दल को बचा लिया गया है। दूतावास और राजदूत ने समूह के लोगों से बात की है और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। ये लोग काठमांडू आ रहे हैं और जल्द ही उनके घर वापस भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

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भारत से अब तक 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी गई

आपदा आने के 24 घंटे के भीतर बुधवार रात को ही भारतीय वायु सेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान 10 टन राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंच गया था। इसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप और जरूरी दवाएं शामिल थीं।

गुरुवार को दूसरी उड़ान में 37.5 टन मानवीय सहायता, दवाइयां और खाद्य पैकेट भेजे गए। कुल मिलाकर भारत ने अब तक करीब 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है। आगे और सहायता भेजने की तैयारी चल रही है।

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