नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे की मिलेगी रीयल टाइम जानकारी, सरकार का मास्टर प्लान तैयार
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित सफर के लिए NHAI 40,000 किलोमीटर हिस्से पर AI और मशीन लर्निंग आधारित डैशकैम एनालिटिक्स सेवा शुरू कर रहा है। ...और पढ़ें

नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार का मास्टर प्लान (फोटो-पीटीआई)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित सफर में बाधा बनने वाली खामियों को दूर करने के लिए अब शिकायत, संज्ञान और समाधान की कागजी प्रक्रिया पूरी तरह से खत्म हो सकती है।
80 हजार किलोमीटर के कुल नेशनल हाईवे नेटवर्क में से करीब 40 हजार किलोमीटर हिस्से पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित डैशकैम एनालिटिक्स सर्विस शुरू कर रहा है। इसके लिए राज्यों को पांच जोन में बांटकर तकनीकी सलाहकार कंपनियों की नियुक्ति कर दी गई है।
प्राधिकरण का दावा है कि इस तकनीकी व्यवस्था में रूट पेट्रोल वाहनों पर हाई रिजाल्यूशन कैमरे लगाए जाएंगे। साप्ताहिक पेट्रोलिंग के माध्यम से निगरानी होगी और तीस प्रकार की खामियाें का रीयल टाइम डाटा उपलब्ध होगा, जिसके आधार पर तुरंत समाधान की व्यवस्था बनाई जाएगी।
नेशनल हाईवे पर लगेंगे डैशकैम
नेशनल हाईवे का नेटवर्क लगभग 80 हजार किलोमीटर का है। कई स्थानों से अक्सर शिकायतें लिखित में आती हैं या इंटरनेट मीडिया पर फोटो-वीडियो आते हैं कि वहां हाईवे पर खड्ढे या दरार हैं, कहीं लाइट खराब है, कहीं अनचाहे कट बना लिए गए हैं तो कहीं अतिक्रमण है।
इन शिकायतों का निस्तारण तो किया जाता है, लेकिन ऐसी खामियां संज्ञान में न आने पर हादसों की आशंका भी रहती है। इसे देखते हुए ही एनएचएआइ के चेयरमैन संतोष यादव ने अपनी टीम को नए तकनीकी निवारण पर काम करने के लिए लगाया।
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प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई तकनीकी विशेषज्ञों के साथ हुए लंबे विचार-विमर्श के बाद एआइ आधारित डैशकैम एनालिटिक्स सर्विस को सबसे उपयुक्त पाया गया। इसका व्यावहारिक परीक्षण भी किया गया। अब इसे लागू करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
अधिकारी ने बताया कि इस तकनीक में पहले चरण में 40 हजार किलोमीटर का हाईवे नेटवर्क लिया गया है। इसे पांच जोन में बांटा गया है। इन हिस्सों पर पेट्रोलिंग के लिए तैनात रूट पेट्रोल वाहनों पर हाई रिजोल्यूशन कैमरे लगाए जाएंगे, जो कि एआइ आधारित होंगे। व्यवस्था बनाई गई है कि यह वाहन रात के समय में साप्ताहिक पेट्रोलिंग करेंगे।
डैशकैम से क्या होगा फायदा?
डैशबोर्ड कैमरे खराब सड़क, खराब रोशनी, सड़क पर दरार, डिवाइडर या क्रैश बैरियर की खामी, अनचाहा कट, खतरनाक यू-टर्न, साइनेज में कमी, धुंधली लेन मार्किंग, हाईवे किनारे अतिक्रमण, जल भराव, जल निकासी में समस्या सहित तीस प्रकार की कमियों को कैप्चर कर उसके फोटो और वीडियो बनाएंगे।
एआइ और मशीन लर्निंग तकनीक वाले इन डैशकैम का रीयल टाइम डाटा एनएचएआइ के डेडिकेटेड पोर्टल और डाटालेक पोर्टल पर भेजेंगे। यह काम करने के लिए पांचाें जोन के लिए तकनीकी सलाहकार कंपनियों की तैनाती कर दी गई है। कुछ कमियों को चिन्हित करने के लिए मासिक सर्वेक्षण भी होगा।
इसके अलावा हाईटेक आपरेशन एंड मेंटिनेंस की इस पूरी प्रक्रिया के संचालन, निगरानी और कमियों के त्वरित समाधान के लिए एनएचएआइ मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों तक मैनपावर उपलब्ध कराने और जिम्मेदारियों का निर्धारण करने के लिए एसओपी भी जारी कर दी गई है।
इस तरह बनाए जाएंगे पांच जोन
- उत्तर- दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर- 4521 किलोमीटर
- पश्चिम- राजस्थान और गुजरात- 7970 किलोमीटर
- मध्य- महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़- 7635 किलोमीटर
- दक्षिण- आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल- 8405 किलोमीटर
- पूर्व- असम, बिहार, झारखंड, मेघालय, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल- 9571 किलोमीटर
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