'8 मई को खुद ही खत्म हो जाएगी सदस्यता', ममता के इस्तीफा न देने पर बोली बीजेपी
पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में हार के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भाजपा ने इसे तानाशाही और लो ...और पढ़ें

ममता बनर्जी और शहजाद पूनावाला।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के एलान पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने उनके इस रुख को तानाशाही करार देते हुए इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ और संवैधानिक ईशनिंदा बताया है।
ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को लेकर आरोप लगाया कि मतगणना में बड़े पैमाने पर धांधली हुई और करीब 100 सीटों पर जनादेश को प्रभावित किया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उन्हें जनमत से नहीं, बल्कि साजिश के तहत हराया गया है।
'बन सकता है खतरनाक उदाहरण'
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रतिक्रिया में कहा कि ममता का रुख “हास्यास्पद और चिंताजनक'' है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण की लोकतांत्रिक परंपरा रही है, लेकिन ममता का कदम इस परंपरा पर हमला है।
पात्रा ने केरल और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नेताओं ने संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि ममता का ये रुख खतरनाक उदाहरण बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में कोई व्यक्ति अपरिहार्य नहीं होता और जनता की इच्छा सर्वोपरि होती है।
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'क्या संविधान उनसे ऊपर है?'
पात्रा के अनुसार, ममता का रवैया ऐसा प्रतीत होता है मानो संविधान उनसे शुरू होकर उन्हीं पर खत्म होता है। उन्होंने कहा कि केरल में पिनराई विजयन हों या तमिलनाडु में एमके स्टालिन, सभी ने शांति से राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया।
भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी ममता पर निशाना साधते हुए कहा कि वह संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने इसे गैर-संवैधानिक और अंबेडकरवादी मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण की अवधारणा को चुनौती देता है।
पूनावाला ने यह भी कहा कि भले ही ममता इस्तीफा न दें, लेकिन 8 मई को विधानसभा भंग होने के साथ उनकी सदस्यता स्वत: समाप्त हो जाएगी।
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