सोनम वांगचुक की 3 मांग, केंद्र के पास एक ऑप्शन; जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह करेंगे टॉक 2.0
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार के सामने शर्त रखी है कि आंदोलनकारी युवाओं के खिलाफ कोई दंडा ...और पढ़ें
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सोनम वांगचुक शर्त के साथ अनशन खत्म करने को तैयार (फोटो-पीटीआई)
HighLights
वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए शर्त रखी।
आंदोलनकारी युवाओं के खिलाफ कार्रवाई न करने की मांग।
नीट पेपर लीक और परीक्षा सुधार पर चर्चा की मांग।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन खत्म करने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार के सामने शर्त रखी है कि आंदोलनकारी युवाओं के खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
यदि सरकार की तरफ से बिना किसी शर्त के आश्वासन दिया जाता है तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। अन्यथा अनशन जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक ने सरकार से की अपील
28 जून से अनशन कर रहे वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा एवं जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर यह बात कही। मंगलवार की रात दोनों मंत्री गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल जाकर वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की थी।
वांगचुक फिलहाल मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सफदरजंग अस्पताल से यहां स्थानांतरित किया गया था। माना जा रहा है कि सरकार उनके पत्र को सकारात्मक रूप से देख रही है।
वांगचुक ने अपने एक्स हैंडल पर भी पत्र को साझा किया और कहा कि जैसे ही सरकार की ओर से आश्वासन मिलेगा, वह न केवल अपना अनशन समाप्त करेंगे बल्कि युवाओं से भी आंदोलन स्थगित कर सरकार के साथ संवाद शुरू करने की अपील करेंगे।
वांगचुक की नरमी के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में चली गई है। माना जा रहा है कि सरकार भी सकारात्मक है। सरकार खुद नहीं चाहती है कि छात्रों को कोई नुकसान हो लेकिन छात्रों की आड़ में अगर गैर सामाजिक तत्व घुसे थे तो उन्हें रोकना भी जरूरी है। चर्चा के लिए सरकार ने संसद के अंदर हामी भर दी है।
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सोनम वांगचुक की 3 मांग
बताया जाता है कि सोनम वांगचुक से फिर से जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मुलाकात हो सकती है। पत्र में वांगचुक ने यह भी कहा कि दोनों मंत्रियों ने उनकी मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है।
- पहली मांग है कि नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
- दूसरी मांग है कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों और जवाबदेही तय करने के लिए संसद में गंभीर और सार्थक चर्चा हो। इसी चर्चा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर भी विचार होना चाहिए।
- हालांकि वांगचुक का कहना है कि उनके लिए सबसे अहम मुद्दा उन छात्रों और युवाओं की सुरक्षा है जिन्होंने आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने सरकार से मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र और युवा के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कदम नहीं उठाया जाए, क्योंकि इनका एकमात्र अपराध जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग करना है।
वांगचुक ने पत्र में 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च का भी उल्लेख किया और दावा किया कि पुलिस की कथित सख्ती और अत्यधिक बल प्रयोग के बावजूद प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।
युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से बात रखी। ऐसे में उनपर कार्रवाई होती है तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर युवाओं का विश्वास कमजोर होगा।
वांगचुक ने पत्र में बताया कि अब तक विभिन्न दलों के 65 सांसद उन्हें पत्र लिख चुके हैं। कई सांसद अस्पताल पहुंचकर उनसे मिल चुके हैं और उन्होंने अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है।
विपक्षी सांसदों ने भी उन्हें भरोसा दिलाया है कि परीक्षा सुधार, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और छात्रों के मुद्दे संसद में मजबूती से उठाए जाएंगे। साथ ही प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई का भी विरोध किया जाएगा।

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