स्कूलों में बायोमीट्रिक अटेंडेंस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जनहित याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली छात्रों के लिए अनिवार्य बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने की जनहित याचिका खारिज कर दी। ...और पढ़ें
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स्कूलों में बायोमीट्रिक अटेंडेंस पर फैसला (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने बायोमीट्रिक हाजिरी याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।
याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की छूट दी गई, अनुच्छेद 32 नहीं।
फर्जी संस्थानों पर रोक और कोचिंग नियमन की मांग थी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्कूली छात्रों के लिए अनिवार्य बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इन्कार कर दिया।
याचिका में फर्जी शिक्षण संस्थानों पर रोक के लिए स्कूली छात्रों की बायोमेट्रिक-आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने के संबंध में केंद्र और राज्यों को निर्देश देने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बायोमीट्रिक हाजिरी याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
जस्टिस पी. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता एनके. गोस्वामी से इस मामले में संबंधित हाई कोर्ट जाने को कहा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका पर सुनवाई करने को इच्छुक नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 32 नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए सीधे सुप्रीम का दरवाजा खटखटाने का अधिकार देता है। पीठ ने कहा, हम आपको हाई कोर्ट जाने की छूट दे रहे हैं। इसके साथ ही अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
गोस्वामी ने याचिका में अन्य मांगों के साथ स्कूली छात्रों के लिए कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई के घंटों की अधिकतम सीमा तय करने तथा कोचिंग संस्थानों के लिए बाध्यकारी आचार संहिता लागू करने का भी अनुरोध किया है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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