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    बदल गया युद्ध का मैदान... ड्रोन पहुंचा रहे दुश्मनों को सबसे ज्यादा नुकसान, पढ़ें रिवर्स इंजीनियरिंग की दिलचस्प कहानी

    Updated: Wed, 11 Mar 2026 08:36 AM (IST)

    ड्रोन आधुनिक युद्धों में एक महत्वपूर्ण हथियार बन गए हैं, जैसे अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध। शाहेद ड्रोन को अमेरिका के पकड़े गए RQ-170 ...और पढ़ें

    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग हो या रूस- यूक्रेन युद्ध। इनमें मिसाइलों के साथ दुश्मन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला दूसरा हथियार ड्रोन है। ईरान का शाहेद ड्रोन इसमें प्रमुख है।

    ईरान ने अमेरिकी तकनीक को कापी करके यह आत्मघाती हमलावर ड्रोन तैयार किया और अब इसका इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ ही कर रहा है। इस रिवर्स इंजीनियरिंग का जवाब अमेरिका अपने अंदाज में दे रहा है, आइये जानते हैं इसकी दिलचस्प कहानी....

    सर्विलांस ड्रोन सेंटिनल

    2007 में अमेरिका ने अपनी वायुसेना में स्टेल्थ सर्विलांस ड्रोन शामिल किया। इसका नाम था आरक्यू 170 सेंटिनल। लाकहिड मार्टिन ने इसे बनाया था। अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सेना इसका इस्तेमाल हवाई निगरानी और जासूसी के लिए कर रही थी।

    लॉकहीड मार्टिन आरक्यू-170 सेंटिनल - विकिपीडिया

    ड्रोन को दुश्मन के हवाई क्षेत्र में किसी की नजर में आए बिना घुसने, तथा टोही तस्वीरें और सिग्नल इंटेलिजेंस जुटाने के लिए डिजाइन किया गया था।

    बेस पर नहीं लौटा सेंटिनल

    एक दिसंबर, 2011 को सेंटिनल ने एक दिन कंधार एयरफील्ड से मिशन के लिए उड़ान भरी लेकिन वापस बेस पर लौटने के बजाए ड्रोन ने ईरान में लैंड किया। यहीं से रिवर्स इंजीनयिरिंग और तकनीक की कापी करने का एक चक्र शुरू हुआ है, जिसने दुनिया में आज के ड्रोन युद्ध के तौर तरीकों को आकार दिया।

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    ईरान के कब्जे में आया सेंटिनल

    ईरान ने 4 दिसंबर, 2011 को बताया कि उसके सशस्त्र बलों ने एक स्टेल्थ टोही ड्रोन को अपने कब्जे में लिया है। यह ड्रोन ईरानी क्षेत्र में काफी अंदर आ गया था। ईरान ने दावा किया कि ड्रोन लाकहिड मार्टिन द्वारा बनाया गया आरक्यू 170 सेंटिनल है और इसे अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए आपरेट कर रही थी। इसके बाद अमेरिका ने भी स्वीकार किया कि उसका एक ड्रोन ईरानी सीमा के नजदीक खो गया है।

    ईरान का रिवर्स इंजीनियरिंग का दावा

    अमेरिकी ड्रोन पकड़ने के कुछ महीनों बाद ईरानी अधिकारियों ने इसकी तस्वीरें दिखाई और घोषणा की कि वे इसकी रिवर्स इंजीनियरिंग करेंगे। ईरान ने कहा कि वह ड्रोन के डिजाइन का विश्लेषण करेगा और इस विमान के स्वदेशी संस्करण तैयार करेगा।

    LUCAS FLM 136: America's cheap Iran-designed Shahed drone clone

    समय के साथ, ईरानी मीडिया ने कई ऐसे ड्रोनों के विकास की खबरें दीं, जिनके बारे में कहा गया कि वे सेंटिनल पर ही आधारित हैं। इनमें शाहेद-171, सिमार्ग और साएछेह शामिल थे। ये दोनों ही फ्लाइंग-विंग ड्रोन हैं, जो देखने में आरक्यू-170 जैसे लगते हैं। बाद में ईरानी अधिकारियों ने बताया कि साएघेह चार प्रेसिजन गाइडेड बम ले जाने में सक्षम है और एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला कर सकता है।

    लादेन को मारने में भी हुआ स्टेल्थ ड्रोन का इस्तेमाल

    2011 में ओसामा बिन लादेन को मार गिराने वाली रेड से पहले सीआइए ने पाकिस्तान के एबटाबाद के ऊपर बार-बार गुप्त निगरानी उड़ानें भरने के लिए आरक्यू-170 ड्रोन का इस्तेमाल किया था। यहीं पर अल-कायदा का मुखिया ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ था।

    Osama Bin Laden 'left $29m inheritance' for al-Qaeda | Al-Qaeda News | Al  Jazeera

    रेड वाली रात को भी स्टेल्थ ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। ड्रोन ने वीडियो फुटेज मुहैया कराया, जिसे राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सदस्यों ने रियल-टाइम में देखा।

    शाहेद ड्रोन का उमार

    आज ईरान के सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले ड्रोन में से एक है शाहेद-136। यह एक तिकोना लोइटरिंग म्यूनिशन है, जिसे अपने टारगेट से टकराकर उसे तबाह करने के लिए डिजाइन किया गया है। बड़े सर्विलांस ड्रोन के उलट ये सिस्टम काफी सस्ते होते हैं। इनका इस्तेमाल पश्चिम एशिया में ईरान-समर्थित गुटों ने किया है और यूक्रेन- युद्ध में रूस भी इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर कर रहा है।

    कम कीमत में प्रभावी हथियार

    शाहेद का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने की एक वजह इनकी कम कीमत भी है। जहां एमक्यू-9 रीपर जैसे एडवांस्ड ड्रोन की कीमत लगभग 16 करोड़ डालर तक है, वहीं शाहेद जैसे छोटे हमलावर ड्रोन की कीमत इसके मुकाबले काफी कम है। शाहेद-136 के डिजाइन को बड़े पैमाने पर कापी किया गया और कापी का यह चक्र अब विपरीत दिशा में चल रहा है।

    ईरानी डिजाइन से ही ईरान पर हमला

    अमेरिकी सेना ने हाल ही में ईरान के शाहेद-136 से प्रेरित एक नया आत्मघाती ड्रोन लुकास तैनात करना शुरू कर दिया है। यह एक कम लागत वाला मान वरहित हमलावर ड्रोन के कमांडर, एडमिरल ब्रैड कूपर का कहना है कि यह एक असली ईरानी ड्रोन का डिजाइन है। हमने इसे कब्जे में लिया, इसके अंदर के पुर्जे निकाल लिए, इसे अमेरिका वापस भेजा और इस पर छोटा सा मेड इन अमेरिका का लेबल लगा दिया। अब हम इसी से ईरानियों पर हमला कर रहे हैं।

    (सोर्स- जागरण रिसर्च)

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