त्रिपक्षीय रक्षा समझौता: अगर भारत करे पाकिस्तान पर कार्रवाई तो क्या सऊदी-तुर्की भी होंगे टारगेट?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और ने 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' किया है, जिसके तहत एक पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। ...और पढ़ें

पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की ने किया त्रिपक्षीय रक्षा समझौता

समय कम है?
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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पिछले एक साल से चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने शुक्रवार को त्रिपक्षीय रक्षा समझौते की घोषणा कर दी है जिससे ना सिर्फ खाड़ी क्षेत्र में, बल्कि अमेरिका की पश्चिम एशिया संबंधी रणनीति और भारत के रणनीतिक हितों पर भी दीर्घकालिक असर डालने वाला साबित हो सकता है।
सउदी अरब के क्राउन प्रिंस व पीएम मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति तैय्यब एर्दोगन और पाकिस्तान के पीएम शाहबाज शरीफ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किये है जिसका नाम है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता।
एक पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा
इसमें सबसे अहम यह है कि तीन देशों में से किसी एक पर कोई भी सशस्त्र हमला हुआ तो उन सभी पर हमला माना जाएगा। यानी भविष्य में अगर भारत पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर जैसी कोई कार्रवाई करता है तो उसे सऊदी अरब और तुर्किए पर भी हमला माना जाएगा। समझौते ने तीनों देशों के बीच पहले से ही प्रगाढ़ रक्षा संबंधों को और मजबूती दे दी है।
भारत सरकार ने इस समझौते पर सधी प्रतिक्रिया दी है लेकिन विदेश मंत्रालय के कई पूर्व राजनयिकों व कूटनीतिकारों ने इससे भारत पर सीधा असर पड़ने की बात कही है। आपरेशन सिंदूर में जिस तरह से तुर्किए ने चीन के साथ मिल कर पाकिस्तान को मदद की थी, उसका एक उदाहरण देते हुए कहा जा रहा है कि अब भारत को सउदी अरब से पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों के लिए मिलने वाले धन को लेकर सतर्क रहना होगा।
भारत ने डील पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा 'हम इस तरह की गतिविधियों पर बहुत ही करीबी नजर बनाये हुए हैं।' विदेश मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि पिछले एक वर्ष से इस तरह की समझौते की तैयारी चल रही थी लेकिन पश्चिम एशिया संकट ने इन देशों को तेजी से फैसला करने के लिए मजबूर किया है।
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इसकी संभावना देखते हुए ही भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इस साल फरवरी, अप्रैल और जुलाई में तीन बार सउदी अरब की यात्रा कर वहां के एनएसए व विदेश मंत्री से अलग अलग स्तर पर बात की। फरवरी व अप्रैल में डोभाल की सउदी यात्रा की योजना अचानक बनाई गई।
डील भारत के लिए नहीं है अच्छी खबर
भारत के कई पूर्व विदेश सचिवों व कूटनीतिक जानकारों ने उक्त त्रिपक्षीय घोषणा में उल्लेखित तथ्यों को भारत के खिलाफ करार दिया है। विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव टी एस त्रिमूर्ति ने सउदी अरब, पाकिस्तान व तुर्किए के इस समझौते को सीधे तौर पर पश्चिम एशिया के ताजे विवाद (ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध) के असर के तौर पर चिन्हित किया है और कहा 'यह भारत के लिए एक अच्छी खबर नहीं है।'
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा “पहली नजर में यह भारतीय हितों के लिए बहुत नकारात्मक घोषणा है। साफ तौर पर कहा गया है कि तीन देशों में से किसी एक पर हमला तीनों पर आक्रमण माना जाएगा। इसमें यह नहीं कहा गया कि ऐसे मामले में देश एक-दूसरे से परामर्श करेंगे।
क्या सऊदी अरब और तुर्किए भी होंगे टारगेट?
क्या इसका मतलब यह है कि अगर पाकिस्तान द्वारा बड़े आतंकवादी हमले के जवाब में भारत जवाबी कार्रवाई करता है तो क्या इसे सऊदी अरब और तुर्किए के खिलाफ हमला माना जाएगा?' सिब्बल ने कहा कि भारत को अब यूएई, इजरायल, ग्रीस और साइप्रस के साथ और विकल्प तलाशने होंगे। साथ ही ईरान से परामर्श करना चाहिए।
त्रिपक्षीय रक्षा सौदे के लिए पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर संग सउदी अरब गये हैं। घोषणा पत्र में कहा गया है कि 'तीनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और इस्लामिक बंधुत्व की भावना के साथ ही साझा रणनीतिक हितों व मजबूत व पुराने रक्षा सहयोग के आधार पर समझौता किया गया है।'
भारत के रणनीतिक हितों पर पड़ेगा गहरा असर
इसके जरिए क्षेत्र (मध्य पूर्व) व इसके इतर शांति, सुरक्षा व स्थिरता को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस घोषणा को पश्चिम एशियाई देशों में अमेरिका की सुरक्षा कवच पर कम होते भरोसे के तौर पर भी देखा जा रहा है। पाकिस्तान व सउदी अरब के बीच पहले से ही एक रक्षा समझौता है। जबकि पिछले वर्ष सउदी अरब ने तुर्किए से द्रोन खरीद का सबसे बड़ा समझौता किया।
तुर्किए और पाकिस्तान के बीच रक्षा क्षेत्र में कई स्तरों पर सहयोग स्थापित हो चुके हैं। आपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किए ने द्रोन के साथ ही अपने सैनिकों को भी द्रोन संचालन के लिए पाकिस्तान में तैनात किया था। तुर्किए व पाकिस्तान से भारत के संबंध अच्छे नहीं है लेकिन भारत व सऊदी अरब के बीच रणनीतिक साझेदारी है।
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