Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यूपी 69000 सहायक शिक्षक भर्ती: 9500 और लोगों को मिलेगी नौकरी, योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया

    By Mala DixitEdited By: Sakshi Gupta
    Updated: Tue, 21 Jul 2026 11:00 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में 9500 और लोगों को समायोजित किया जा सकता है। ...और पढ़ें

    यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शिक्षक भर्ती मामले के बारे में बताया

    यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शिक्षक भर्ती मामले के बारे में बताया

    HighLights

    1. यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को 9500 पद समायोजन की जानकारी दी।

    2. आरक्षित वर्ग ने पहले ऑफर ठुकराने वालों को शामिल करने पर आपत्ति जताई।

    3. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की।

    माला दीक्षित, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 2018 की 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में नियुक्ति का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण फिर जगी है।

    मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 9500 और लोगों को नौकरी में समाहित किया जा सकता है। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में एक नयी सूची भी तैयार करके हलफनामे के साथ कोर्ट में दाखिल की।

    हालांकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने प्रदेश सरकार के हलफनामे पर सवाल उठाया और शुरुआत में नौकरी का आफर न स्वीकार करने वाले 4946 उम्मीदवारों को फिर नई सूची में शामिल किये जाने पर आपत्ति उठाई।

    यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया

    कोर्ट ने भी राज्य सरकार से पूछा कि जिन्हें पहले ऑफर दिया गया था और उन्होंने स्वीकार नहीं किया था तो उन्हें नयी सूची में क्यों शामिल किया गया। इस पर राज्य सरकार का कहना था कि कोर्ट कहेगा तो वे उन्हें हटा देंगे लेकिन वे मेरिट में ऊपर थे इसलिए सूची में शामिल किया।

    कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें मेरिट पर सुनने की बात कहते हुए मामले को अगले मंगलवार फिर सुनवाई पर लगाने का आदेश दिया है। इस बीच पक्षकारों को लिखित दलीलें और संक्षिप्त नोट दाखिल करने को कहा गया है।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही कोर्ट के समक्ष बहुत सारे पक्षकार हों लेकिन वो दोनों तरफ से पांच-पांच वकीलों और एक वकील अर्जी दाखिल करने वालों की ओर से सुनेगा बस। ये निर्देश न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले पर सुनवाई के दौरान दिए।

    खबरें और भी

    पूर्व सुनवाई में 2020 से नौकरी पाने की कानूनी लड़ाई लड़ रहे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनकी मांग ये नहीं है कि जो लोग नौकरी कर रहे हैं उन्हें हटा दिया जाए, उनकी मांग तो ये है कि उन्हें भी नौकरी दी जाए वे 2020 से कोर्ट दर कोर्ट भटक रहे हैं।

    इस पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या वह और लोगों को समायोजित कर सकती है। पिछली सुनवाई पर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वो उन लोगों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के मुताबिक मूलचयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं।

    हालांकि ऐसा करना उम्मीदवारों के प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगा। यह भी कहा था कि इसे मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाए और भविष्य के लिए नजीर न माना जाए।

    तब कोर्ट ने प्रदेश सरकार से इसकी प्रक्रिया तैयार करके पेश करने को कहा था। जिसके अनुपालन में प्रदेश सरकार ने ये ताजा हलफनामा दाखिल किया है।

    9500 और लोगों को मिलेगी नौकरी

    आज मामले पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने हलफनामा दाखिल किया है। चयन सूची दोबारा तैयार की गई है और 9500 और लोगों को समायोजित किया जा सकता है। लेकिन हलफनामे पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकीलों ने कड़ा ऐतराज जताया।

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इसमें करीब 4946 वो लोग हैं जो पहले नियुक्ति का ऑफर अस्वीकार कर चुके हैं। जबकि कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था कि जो लोग नौकरी में हैं उन्हें हटाए बगैर आरक्षित वर्ग के कितने और उम्मीदवारों को समायोजित किया जा सकता है।

    उनकी आपत्तियों पर पीठ ने भी ऐसे लोगों को सूची में शामिल करने पर सवाल किया जिस पर भाटी ने कहा कि उनकी मेरिट ऊपर थी इसलिए शामिल किया है कोर्ट कहेगा तो हटा देंगे।

    कोर्ट ने कहा कि यहां हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है कोर्ट सभी पक्षों की दलीलें सुनेगा। कोर्ट ने पक्षकारों से सोमवार तक लिखित दलीलें दाखिल करने का समय देते हुए मंगलवार को मामला सुनवाई पर लगा दिया।

    ये भर्ती 2018 की है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती दी गई है। जिसमें खंडपीठ ने भर्ती की मेरिट लिस्ट रद कर दी थी और सरकार को आदेश दिया था कि इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को मूल चयन सूची के रूप में आरक्षण के सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए तीन महीने के भीतर फिर नये सिरे से बनाया जाए।

    रद हुई चयन सूची के मुताबिक सामान्य वर्ग के जिन शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी थी उन्होंने नौकरी पर खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

    कोर्ट ने शुरू में ही हाई कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी थी। आरक्षण के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल कर रखी है।

    यह भी पढ़ें- 'NEET पेपर लीक- एक घोर पाप', पीएम मोदी ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का दिया भरोसा