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सेब-केला, उबले आलू और ढेरों खिलौने... ओडिशा के जंगल में मिले नन्हे Orangutan की ऐसी हो रही खातिरदारी!

By Pradeep SinghEdited By: Sanjeev Kumar
Published: Thu, 10 Sep 2026 12:36 PM (GMT+05:30)

ओडिशा के बालासोर जंगल में मिले पांच नन्हे ओरंगुटान अब भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में विशेष देखभाल में हैं।

रेस्क्यू किए जाने के बाद इन पांचों शिशु ओरंगुटान को नंदनकानन लाया गया है।

रेस्क्यू किए जाने के बाद इन पांचों शिशु ओरंगुटान को नंदनकानन लाया गया है।

HighLights

  1. बालासोर में मिले पांच नन्हे ओरंगुटान नंदनकानन जू पहुंचे।

  2. नंदनकानन में विशेष क्वारंटाइन, मैसूर जू की सलाह पर डाइट।

  3. अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी का गहराया शक, जांच एजेंसियां सक्रिय।

जासं, जमशेदपुर/भुवनेश्वर। ओडिशा के बालासोर जिले के जंगलों में अचानक मिले पांच नन्हे ओरंगुटान अब भुवनेश्वर स्थित प्रसिद्ध नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के सबसे खास मेहमान बन गए हैं। 
 
रेस्क्यू किए जाने के बाद इन पांचों शिशु ओरंगुटान को नंदनकानन लाया गया है। इनके स्वागत और देखभाल के लिए एक विशेष तापमान नियंत्रित (Temperature Controlled) क्वारंटाइन सेंटर तैयार किया गया है, जहां तीन केयरटेकर और पशु डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे निगरानी में जुटी है।
 

एक को था बुखार, सीसीटीवी से रखी जा रही नजर

स्वास्थ्य जांच के दौरान तीन नर और दो मादा (3 Male, 2 Female) ओरंगुटान पाए गए। इनमें से एक को तेज बुखार था, जिसे डॉक्टरों की सलाह पर आवश्यक दवाइयां दी गईं। 
 
फिलहाल सभी की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पूरे क्वारंटाइन सेंटर को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है।
 

मैसूर जू की सलाह पर बना स्पेशल डाइट चार्ट

नन्हे मेहमानों को तंदुरुस्त रखने के लिए मैसूर जू से विशेष सलाह ली गई है, क्योंकि उनके पास ओरंगुटान की देखभाल का पुराना अनुभव है।

  •     छोटे ओरंगुटान: दो बेहद छोटे शिशुओं को मैश किया हुआ आलू, उबला सेब और पोषणयुक्त दूध दिया जा रहा है।
  •     बाकी तीन ओरंगुटान: तीन अन्य को केला और सेब खिलाया जा रहा है।
  •     भोजन का समय: शरीर में पोषण और ऊर्जा बनाए रखने के लिए हर दो घंटे के अंतराल पर भोजन कराया जा रहा है।
मानसिक तनाव दूर करने और उन्हें सहज महसूस कराने के लिए क्वारंटाइन कक्ष में खिलौने भी रखे गए हैं। जू प्रशासन का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता इन्हें पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर करना है।
 

अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी का गहराया शक

भारत या ओडिशा के जंगलों में ओरंगुटान का पाया जाना सामान्य नहीं है, क्योंकि यह भारत की मूल (देशी) प्रजाति नहीं है। इस घटना ने वन्यजीव अधिकारियों को हैरान कर दिया है। 
 
आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का हाथ हो सकता है। जांच एजेंसियां इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि इतने छोटे ओरंगुटान भारत की सीमा में कैसे दाखिल हुए और उन्हें बालासोर के जंगल में किसने छोड़ा।

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