बीजू-नवीन फाउंडेशन पर विवाद: 10 महीने की चुप्पी पर नवीन पटनायक घिरे, बीजद में भी असंतोष
ओडिशा में बीजू-नवीन फाउंडेशन को लेकर विवाद गहरा गया है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा इसके अस्तित्व को स्वीकार करने के बाद 10 महीने की गोपनीयता पर सव ...और पढ़ें

नवीन पटनायक (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में बीजू-नवीन फाउंडेशन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गहराता जा रहा है। बीजद सुप्रीमो पटनायक द्वारा ट्रस्ट के अस्तित्व को स्वीकार करने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब फाउंडेशन पहले से मौजूद था तो इसे करीब 10 महीने तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
मामले को लेकर बीजद के अंदर भी असहजता दिख रही है। वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने मीडिया के सामने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस तरह से जानकारी सामने आ रही है, उससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने मीडिया पर भी आरोप लगाया कि वह केवल सरकार से जुड़ी खबरें दिखा रही है और विपक्ष की बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
पूर्व बीजद नेता श्रीमयी मिश्रा ने कहा कि नवीन पटनायक का संक्षिप्त स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों के नाम, पिछले 10 महीनों में हुए काम और ट्रस्ट के गठन का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बीजू पटनायक परिवार से कोई सदस्य ट्रस्ट में क्यों नहीं है और क्या इस तरह के और भी ट्रस्ट बनाए गए हैं।
इधर भाजपा विधायक बाबू सिंह ने कहा कि पहले बीजद के कुछ नेता ट्रस्ट के अस्तित्व से इनकार कर रहे थे, लेकिन अब स्वयं नवीन पटनायक ने इसे स्वीकार कर लिया है। ऐसे में यह पार्टी के नेताओं के लिए शर्म की बात है। उन्होंने पूछा कि अगर पार्टी के नेता ही सच्चाई नहीं जानते तो जनता किस पर भरोसा करे।
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बीजद नेताओं ने फाउंडेशन का किया बचाव
हालांकि बीजद के कुछ नेताओं ने फाउंडेशन का बचाव भी किया है। बीजद नेता स्नेहांगिनी छुरिया ने कहा कि यह बीजू पटनायक और नवीन पटनायक की निजी संपत्ति से बनाया गया ट्रस्ट है और इसे लेकर अनावश्यक विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजू पटनायक ने अपने जीवन में कई बार निजी संपत्ति का उपयोग जनसेवा के लिए किया था।
बीजद विधायक अश्विनी पात्र ने कहा कि बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेता थे, इसलिए दिल्ली में इस तरह का ट्रस्ट बनाया जाना असंभव नहीं है। वहीं भाजपा विधायक इराशीष आचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि पहले ट्रस्ट से इनकार किया गया और अब उसे स्वीकार किया जा रहा है, इससे साफ है कि सच्चाई छिपाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे मामले पर खुलकर सफाई देनी चाहिए।