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बीजू बाबू पर टिप्पणी से ओडिशा में गरमाई सियासत, नवीन पटनायक ने कहा- निशिकांत दुबे को मानसिक डॉक्टर की जरूरत

Published: Mon, 30 Mar 2026 04:46 PM (IST)

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की बीजू पटनायक पर टिप्पणी से ओडिशा में सियासी घमासान छिड़ गया है। नवीन पटनायक ने ...और पढ़ें

नवीन पटनायक और निशिकांत दुबे। (फाइल फोटो)

नवीन पटनायक और निशिकांत दुबे। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. नवीन पटनायक ने निशिकांत दुबे की टिप्पणी को आपत्तिजनक बताया।

  2. बीजद सांसद सस्मित पात्र ने विरोध में इस्तीफा दिया।

  3. निशिकांत दुबे ने अपनी टिप्पणी पर सफाई पेश की।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा के महानायक बीजू पटनायक को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की टिप्पणी पर प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है।

आमतौर पर शांत रहने वाले ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री तथा बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक ने सोमवार को कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बयान को बेहद आपत्तिजनक करार दिया और कहा कि दुबे को मानसिक डॉक्टर की जरूरत है।

नवीन पटनायक ने कहा कि दुबे की टिप्पणियां चौंकाने वाली हैं और यह उनके इतिहास के ज्ञान पर सवाल खड़ा करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चीन के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए दिल्ली में बीजू बाबू के कार्यालय के पास ही अपना दफ्तर बनाया था।

अपने बचपन की यादें साझा करते हुए पटनायक ने कहा कि वह उस समय करीब 13 वर्ष के थे और उन्हें बीजू पटनायक का चीन के हमले को लेकर गुस्सा और देशहित में किए गए प्रयास आज भी याद हैं।

बीजद का विरोध तेज, सस्मित पात्र ने दिया इस्तीफा

विवाद बढ़ने के बाद बीजद से राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्र ने भी दुबे के बयान को अपमानजनक और झूठा बताते हुए कड़ी निंदा की। विरोध स्वरूप उन्होंने संचार एवं आईटी संबंधी संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया।

दुबे की सफाई- बीजू बाबू का हमेशा सम्मान

विवाद के बीच निशिकांत दुबे ने सफाई देते हुए कहा कि बीजू पटनायक एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और भाजपा हमेशा उनका सम्मान करती रही है। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी नेहरू-गांधी परिवार पर एक श्रृंखला का हिस्सा थी और उन्होंने बीजू बाबू पर कोई आरोप नहीं लगाया।

दिलीप राय बोले- देश के विरले राष्ट्रनिर्माता थे बीजू बाबू

नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य दिलीप रे ने भी इंटरनेट मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजू बाबू साहस, त्याग और देशभक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि उनके योगदान को हल्की राजनीतिक टिप्पणियों तक सीमित करना अनुचित और अपमानजनक है।

इस बयानबाजी के बाद ओडिशा की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत हैं।

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