ओडिशा: 11 साल बाद कंधमाल दहेज हत्या मामले में आया फैसला, पति को 10; ससुराल पक्ष को 7-7 वर्ष की सजा
कंधमाल के बहुचर्चित दहेज हत्या मामले में 11 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। पति को 10 साल और उसके माता-पिता व दो बहनों को 7-7 साल की सजा सुनाई गई है ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
कंधमाल दहेज हत्या मामले में 11 साल बाद आया फैसला।
पति को 10 वर्ष, ससुराल पक्ष को 7-7 वर्ष की सजा।
अदालत का फैसला दहेज प्रथा के खिलाफ कड़ा संदेश।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। कंधमाल जिले के बहुचर्चित दहेज हत्या मामले में 11 वर्ष बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए मृतका के पति सहित पांच आरोपितों को दोषी करार दिया है।
फुलवाणी स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने शनिवार को सुनवाई पूरी करते हुए पति को 10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा उसके माता-पिता और दो बहनों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
मामला वर्ष 2015 का है। जिले के गुमागड़ा गांव निवासी मीरा बेहरा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि विवाह के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। प्रताड़ना के चलते उसकी मौत हुई, जिसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और साक्ष्य जुटाने के बाद पति बिजय बेहरा, उसके पिता, मां तथा दो बहनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। इसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहा। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और विभिन्न साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद अदालत ने पति और उसके परिजनों को दोषी पाया। सरकारी अधिवक्ता मालती पाल ने कहा कि यह फैसला समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। दहेज के लिए महिलाओं को प्रताड़ित करने वालों को कानून के दायरे में आकर सजा भुगतनी ही पड़ती है।
अदालत के इस फैसले से मृतका के परिजनों को वर्षों बाद न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है। वहीं, सामाजिक संगठनों ने भी निर्णय का स्वागत करते हुए इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक सख्त संदेश बताया है।
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