अस्पताल से फिर जेल पहुंचा धनेश्वर झांकर, ओडिशा में कुख्यात के खिलाफ दर्ज हैं 41 केस
संबलपुर के कुख्यात अपराधी धनेश्वर झांकर उर्फ टीमा को पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद अस्पताल से जेल भेज दिया गया है। 19 मार्च को गोली लगने के बाद ब ...और पढ़ें

अस्पताल से रेढ़ाखोल लाया गया धनेश्वर।
HighLights
पुलिस मुठभेड़ में घायल धनेश्वर झांकर अस्पताल से जेल पहुंचा।
कुख्यात अपराधी पर ओडिशा में 41 गंभीर मामले दर्ज हैं।
पुलिस के लिए धनेश्वर को पकड़ना बड़ी चुनौती थी।
संवाद सहयोगी, संबलपुर। ओडिशा के संबलपुर जिले में बीते गुरुवार 19 मार्च की सुबह रेढ़ाखोल पुलिस की गोली से घायल कुख्यात अपराधी 42 वर्षीय धनेश्वर झांकर उर्फ टीमा अब अस्पताल से जेल पहुंच गया है।
पुलिस ने सोमवार 23 मार्च के दिन बुर्ला हॉस्पिटल से वापस लाए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में उसे जेल भेज दिया है। गौरतलब है कि घटना वाले दिन पुलिस ने धनेश्वर उर्फ टीमा के तीन सहयोगियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
दाहिने पैर में लगी थी गोली
पुलिस के साथ एनकाउंटर में गोली धनेश्वर उर्फ टीमा के दाहिने पैर में लगने से उसे इलाज के लिए बुर्ला हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था।
संबलपुर समेत ओडिशा के अन्य कई जिला की पुलिस के लिए कुख्यात अपराधी धनेश्वर झांकर उर्फ टीमा को गिरफ्तार करना बड़ी चुनौती थी।
जानकारों की मानें तो धनेश्वर की चतुराई के सामने पुलिस भी बौनी दिखती थी। उसने खुद को पुलिस की गिरफ्त से बचाने के लिए तरह से साजिशें रची थीं।
फुटबॉल खिलाड़ी रहा है धनेश्वर
स्थानीय सदर थाना अंतर्गत रासनपुर गांव का रहने वाला धनेश्वर झांकर उर्फ टीमा एक अच्छा फुटबॉल खिलाड़ी और शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त भी है।
वर्ष 2013 में वह अपने गांव के कुछ अपराधी युवकों के साथ मिलकर विद्युत टॉवरों से एल्युमीनियम के तार काटकर चोरी करने लगा था।
इसी दौरान उसकी मुलाकात स्थानीय सोनापाली इलाके के कुख्यात अपराधी सरफराज खान उर्फ बाबू कंग से हुई। दोनों ने मिलकर कई अपराध किए।

कुख्यात अपराधी धनेश्वर झांकर।
2018 से अलग गिरोह बनाकर करने लगा अपराध
बाबू कंग कई बार गिरफ्तार हुआ, तब धनेश्वर उर्फ टीमा अलग गिरोह बनाकर अपराध करने लगा। वर्ष 2018 में संबलपुर की कुचिंडा पुलिस उसे पहली बार गिरफ्तार किया था।
मयूरभंज पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया, लेकिन धनेश्वर चकमा देकर केंदूझर से फरार हो गया था। धनेश्वर उर्फ टीमा की चतुराई और शातिर दिमाग का अंदाजा लगाना पुलिस के लिए भी आसान नहीं था।
अलग-अलग जिलों में अपराध करने के लिए वह वहां के अपराधियों की सहायता लेता था। उसकी दो पत्नी हैं, लेकिन वह कभी कभार ही अपनी पत्नियों के पास जाता था। उसका अधिकांश समय जंगलों में गुजरता था।
जंगल में दौड़कर खुद को रखता चुस्त-दुरुस्त
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, धनेश्वर जंगल में दौड़कर खुद को चुस्त-दुरुस्त रखने और रात का समय पेड़ों पर सोकर बिताने में गुजारता था।
अगर कभी वह अपने घर आता भी था तब उसके पाले हुए आवारा कुत्ते उसके घर के आसपास होते थे और अनजान लोग को देखकर भौंकने लगते थे और धनेश्वर सतर्क हो जाता था।
सोशल मीडिया से रहता था दूर
धनेश्वर उर्फ टीमा के पास करीब दर्जन भर मोबाइल फोन थे और प्रत्येक मोबाइल में उसने अलग-अलग सिम डाल रखा था, लेकिन वह कभी भी सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करता था।
पुलिस की नजरों से बचा रहता। बावजूद इसके संबलपुर पुलिस ने उसे दूसरी बार अक्टूबर 2021 में और तीसरी बार मार्च 2026 को गिरफ्तार करने में सफल रही।
बता दें कि धनेश्वर झांकर उर्फ टीमा के एनकाउंटर के बाद जिला पुलिस अधीक्षक मुकेश भामू की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी दी गई थी।
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