ओडिशा कैबिनेट के बड़े फैसले: किसानों को सिंचाई, आदिवासियों को रोजगार और शहरी गरीबों को घर की सौगात
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई ओडिशा मंत्रिमंडल की बैठक में 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। ...और पढ़ें

ओडिशा कैबिनेट के 11 बड़े फैसले। फाइल फोटो
HighLights
किसानों के लिए नई सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी।
जनजातीय परिवारों हेतु ₹2,995 करोड़ की जीविका योजना।
शहरी गरीबों के लिए ₹1,615 करोड़ की आवास योजना।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई ओडिशा मंत्रिमंडल की बैठक में 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
कैबिनेट के फैसलों में किसानों के लिए नई सिंचाई परियोजनाएं, जनजातीय परिवारों के लिए 2,995 करोड़ रुपये की जीविका योजना और शहरी गरीबों के लिए 1,615 करोड़ रुपये की आवास योजना प्रमुख हैं।
सरकार का दावा है कि इन फैसलों से किसानों की आय बढ़ेगी, आदिवासी परिवारों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और शहरों में गरीबों को पक्का घर उपलब्ध कराया जा सकेगा।
किसानों को मिलेगा सिंचाई का लाभ
कैबिनेट ने बैतरणी नदी पर आनंदपुर बैराज और इसकी वितरण प्रणाली से जुड़े कई पैकेजों को मंजूरी दी है। परियोजना के माध्यम से केन्दुझर और बालेश्वर जिलों की करीब 60 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सालंदी लेफ्ट मेन कैनाल से भूमिगत पाइपलाइन के जरिए बालेश्वर जिले के सोरो, औपदा, नीलगिरि, रेमुणा और बालेश्वर क्षेत्र की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि तक पानी पहुंचाया जाएगा। विभिन्न परियोजनाओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इनके पूरा होने के बाद किसानों को सालभर सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।
इसके अलावा पार्वती गिरी बृहत लिफ्ट सिंचाई योजना के तहत खुर्दा, पुरी, रायगढ़ा और गजपति जिलों में नई सिंचाई परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। इन योजनाओं से 23,974 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सिंचित होगी। सरकार का मानना है कि इससे किसान पारंपरिक खेती के साथ नकदी फसलों की खेती की ओर भी बढ़ेंगे।
जनजातीय परिवारों के लिए 2,995 करोड़ की योजना
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन 2.0 को भी मंजूरी दी। इस योजना पर 2,995 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहने वाली इस योजना से राज्य के लगभग 8 लाख अनुसूचित जनजाति और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवार लाभान्वित होंगे।
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योजना के तहत कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, रेशम उत्पादन, हस्तशिल्प और ग्रामीण उद्यमिता जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। लाभार्थियों को आर्थिक सहायता सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी। पीवीटीजी समुदायों के लिए स्वास्थ्य, पोषण और आधारभूत ढांचे के विकास हेतु अलग से 500 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है।
शहरी गरीबों के लिए ‘बंधु’ आवास योजना
शहरी क्षेत्रों में गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के साथ ‘पीएमएवाई-यू (बंधु)’ योजना शुरू करने का फैसला किया है। इस योजना पर 1,615 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 30 हजार किफायती आवास, 10 हजार किराये के मकान और ट्रांजिट हाउस बनाए जाएंगे। लाभार्थियों को गृह निर्माण के लिए अतिरिक्त सहायता, सस्ती दर पर ऋण और ब्याज में रियायत भी दी जाएगी।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक शहरी क्षेत्रों में पक्के मकानों की हिस्सेदारी 59 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक पहुंचाना है। आवासीय परिसरों में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और खेल मैदान जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
बनेगा पहला आर्थिक क्षेत्र
कैबिनेट ने ओडिशा विकास प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन को मंजूरी देते हुए आर्थिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (ईआरडीए) के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। इसके तहत भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप को राज्य का पहला आर्थिक क्षेत्र बनाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस पहल से क्षेत्रीय स्तर पर समग्र विकास योजनाएं तैयार करने और निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी। भविष्य में बरगढ़-झारसुगुड़ा-संबलपुर, बरहमपुर-छत्रपुर-गोपालपुर और जयपुर-कोरापुट-सुनाबेड़ा क्षेत्रों को भी आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इन फैसलों को आगामी वर्षों में कृषि, आवास, जनजातीय कल्याण और शहरी विकास के क्षेत्र में राज्य सरकार की बड़ी पहल माना जा रहा है