CAG रिपोर्ट में ओडिशा का ‘मेगा सिस्टम फेल’: 3295 करोड़ से अधिक की अनियमितता उजागर, खनन से जेल तक लापरवाही
ओडिशा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने राज्य की प्रशासनिक मशीनरी में गंभीर खामियां उजागर की हैं। ₹3,295 करोड़ से अधिक की वित्तीय ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

समय कम है?
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संतोष कुमार पांडेय, अनुगुल। ओडिशा में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया रिपोर्टों ने राज्य की प्रशासनिक मशीनरी की गहरी खामियों को उजागर करते हुए वित्तीय अनुशासन, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खनन, जेल प्रबंधन, पोषण योजना, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सामने आई अनियमितताओं को जोड़ें तो कुल वित्तीय प्रभाव ₹3,295 करोड़ से अधिक आंका गया है, जो एक व्यापक सिस्टम फेल की ओर संकेत करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, खनन क्षेत्र में अवैध खनन, रॉयल्टी की सही वसूली न होना और नियमों की अनदेखी के कारण सरकार को करीब ₹250 करोड़ का प्रत्यक्ष राजस्व नुकसान हुआ। कई खदानों में बिना अनुमति खनन चलता रहा और संबंधित विभाग समय पर कार्रवाई करने में विफल रहा। यह स्थिति न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनी, बल्कि पर्यावरणीय मानकों की भी अनदेखी हुई।
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे बड़ा वित्तीय अनियमितता सामने आई है। सीवरेज और ड्रेनेज परियोजनाओं में करीब ₹3,045 करोड़ का अव्यवस्थित और अप्रभावी खर्च पाया गया। कई परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, जिससे न तो जनता को लाभ मिला और न ही निवेश का अपेक्षित परिणाम सामने आया।
जेल प्रबंधन की स्थिति भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। सीएजी ने पाया कि राज्य की कई जेलों में सुरक्षा और संसाधनों की भारी कमी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कई जेलों में हथियार अनुपयोगी स्थिति में हैं जिसमें 234 राइफलों में से 96 बेकार पाई गईं।
इसके अलावा, 2014 से 2017 के बीच 21 कैदियों के फरार होने की घटनाएं दर्ज की गईं। करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए जैमर और सीसीटीवी सिस्टम भी प्रभावी नहीं हैं। मानसिक रूप से बीमार कैदियों को सामान्य कैदियों के साथ रखने जैसी गंभीर लापरवाही भी सामने आई है।
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स्कूलों में संचालित प्रधानमंत्री पोषण (पीएम-पोषण) योजना में भी वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ियां सामने आई हैं। कई स्थानों पर बच्चों को निम्न गुणवत्ता या सड़ा हुआ चावल दिया गया, जबकि किचन शेड और भंडारण जैसी बुनियादी सुविधाएं कागजों में ही सीमित पाई गईं। लाभार्थियों और खाद्यान्न वितरण के आंकड़ों में विसंगतियां यह दर्शाती हैं कि निगरानी तंत्र प्रभावी नहीं है।
कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लागू सीसीटीएनएस सिस्टम भी अपेक्षित परिणाम देने में विफल रहा है। एफआईआर अपलोड में देरी, डेटा एंट्री में त्रुटियां और पुलिस थानों के बीच समन्वय की कमी के कारण अपराध नियंत्रण और जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
उच्च शिक्षा संस्थानों और शहरी सेवाओं में भी वित्तीय कुप्रबंधन सामने आया है। कई संस्थानों में फंड का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के विपरीत किया गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता और जल शोधन प्रणाली में गंभीर खामियां पाई गईं।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि सीएजी की पूर्व रिपोर्टों में उजागर की गई कमियों पर भी समय पर कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया कमजोर बनी हुई है।
सरकार का एक्शन प्लान
सीएजी रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू करने का दावा किया है। खनन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विशेष प्रवर्तन अभियान शुरू किया गया है और बकाया रॉयल्टी की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। जेलों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की भर्ती, सीसीटीवी और उपकरणों के अपग्रेडेशन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पीएम-पोषण योजना में गुणवत्ता सुधार के लिए खाद्यान्न की थर्ड-पार्टी जांच और जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है। अधूरी पड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए रिव्यू मैकेनिज्म और जवाबदेही तय करने के निर्देश जारी किए गए हैं। सीसीटीएनएस सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए डेटा अपडेट और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
हालांकि, विपक्ष ने इन कदमों को “देर से और अपर्याप्त” बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कुल मिलाकर, सीएजी की रिपोर्ट ने ओडिशा में शासन व्यवस्था के विभिन्न स्तरों पर व्याप्त खामियों को उजागर कर दिया है। अब आने वाला समय ही तय करेगा कि यह सरकार इन अनियमितताओं पर सख्ती से कार्रवाई करते हुए वाकई सिस्टम में सुधार ला पाएगी या सिर्फ़ कागजों में खानापूर्ति तक ही सिमट जाएगी।