विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

न सड़क, न एंबुलेंस... ओडिशा में प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को बेड़े पर लादकर पहुंचाया अस्पताल; बेटे को दिया जन्म

Updated: Fri, 21 Aug 2026 07:41 PM (IST)

ओडिशा के भद्रक में बाढ़ से घिरे गांव में गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर घर के दरवाजे को बेड़ा बनाकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसने बच्चे को जन्म दिया। नवजात के साथ घर लौटने के लिए भी उसे इसी बेड़े का सहारा लेना पड़ा।

नवजात के साथ मां को बेड़े से ही घर लौटना पड़ा। जागरण

नवजात के साथ मां को बेड़े से ही घर लौटना पड़ा। जागरण

HighLights

  1. बाढ़ में फंसी गर्भवती को दरवाजे के बेड़े से अस्पताल पहुंचाया।

  2. नवजात के साथ मां को बेड़े से ही घर लौटना पड़ा।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा के भद्रक जिले में बाढ़ प्रभावित इलाकों की बदहाली की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। यहां सड़क और एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिलने पर प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को परिजनों ने घर का दरवाजा निकालकर अस्थायी बेड़ा बनाया और उसी के सहारे अस्पताल पहुंचाया।

महिला ने अस्पताल पहुंचते ही बेटे को जन्म दिया। तीन दिन बाद नवजात के साथ घर लौटने के लिए भी उसे बांस के बेड़े का सहारा लेना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला भद्रक जिले के बसुदेवपुर ब्लॉक के जगन्नाथ प्रसाद पंचायत अंतर्गत दधिवामनपुर पाल गांव का है। गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। परशुराम मलिक की पत्नी पूजारानी मलिक को 18 अगस्त की रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार ने एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन गांव तक जाने वाली सड़क जलमग्न होने के कारण वाहन वहां नहीं पहुंच सका।

स्थिति गंभीर होने पर परिजनों ने घर का लकड़ी का दरवाजा निकालकर उसे अस्थायी बेड़े का रूप दिया। ग्रामीणों की मदद से पूजारानी को उस पर लिटाकर पानी से भरे रास्ते पार कर बसुदेवपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार रात 9:25 बजे उन्हें भर्ती किया गया और महज एक मिनट बाद, 9:26 बजे उन्होंने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अब भी कमर तक पानी भरा हुआ है। लोगों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान लाने के लिए करीब दो किलोमीटर तक पानी में पैदल चलना पड़ रहा है। मंतेई नदी में मगरमच्छों की मौजूदगी का डर अलग बना हुआ है।

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी पूजारानी की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। तीन दिन के नवजात को गोद में लेकर उन्हें बांस के बने अस्थायी बेड़े से घर लौटना पड़ा, क्योंकि गांव तक पहुंचने वाला रास्ता अभी भी पानी में डूबा हुआ है।

इस घटना ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव की निवासी संजुलता मलिक का आरोप है कि बाढ़ के करीब एक माह बाद भी ओड्राफ टीम को छोड़कर कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव की स्थिति का जायजा लेने नहीं पहुंचा।

एक ओर सरकार बाढ़ राहत और पुनर्वास के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर नवजात को गोद में लेकर बेड़े से घर लौटती मां की तस्वीरें ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं।

यह भी पढ़ेः ओडिशा में 6 IPS अफसरों का तबादला, हिमांशु लाल को EOW और STF की मिली कमान