ओडिशा में बारिश-बाढ़ का कहर: हरकत में आई सरकार, टूटी सड़कों और पुलों की 'वॉर मोड' में मरम्मत के आदेश
ओडिशा में लगातार बारिश और बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों व सरकारी ढांचों की मरम्मत के लिए सरकार ने 'वॉर मोड' में काम करने के आदेश दिए हैं। ...और पढ़ें
HighLights
सरकार ने बाढ़ क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों की मरम्मत के आदेश दिए।
लोक निर्माण विभाग को 'वॉर मोड' में काम करने का निर्देश।
प्राथमिकता पर संपर्क व्यवस्था बहाल करने, देरी न करने पर जोर।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। लगातार बारिश और बाढ़ ने ओडिशा के कई इलाकों में सड़कों को तोड़ दिया, पुलों की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए और सरकारी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। कई स्थानों पर संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने के बाद अब सरकार हरकत में आई है। राज्य सरकार ने क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और सरकारी इमारतों की युद्धस्तर पर मरम्मत के आदेश दिए हैं।
लोक निर्माण विभाग को स्पष्ट निर्देश है कि राष्ट्रीय राजमार्गों समेत सभी प्रभावित मार्गों को जल्द से जल्द यातायात योग्य बनाया जाए और लोगों की आवाजाही में किसी तरह की बाधा न रहे।
लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं
लोक निर्माण मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने गुरुवार को बाढ़ की स्थिति और बारिश से बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की उच्चस्तरीय समीक्षा की। प्रधान सचिव संजय कुमार सिंह और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था की तत्काल बहाली पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
मंत्री के निर्देश के बाद लोक निर्माण विभाग ने पूरे तंत्र को ‘वॉर मोड’ में काम करने को कहा है। ओडिशा ब्रिज एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओबीसीसी), इंजीनियर-इन-चीफ (सिविल-कम-रोड्स), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के क्षेत्रीय कार्यालयों तथा संबंधित मुख्य अभियंताओं को तत्काल मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य शुरू करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
संपर्क मार्गों की पहचान कर तत्काल काम शुरू किया जाए
विभाग ने सभी कार्यकारी एजेंसियों को कहा है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में सड़क कटाव, धंसे हुए हिस्सों, क्षतिग्रस्त पुलों और बाधित संपर्क मार्गों की पहचान कर तत्काल काम शुरू किया जाए। जहां यातायात पूरी तरह ठप है, वहां प्राथमिकता के आधार पर संपर्क बहाल किया जाए। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों और सुरक्षा संकेतों की व्यवस्था भी करने को कहा गया है।
खबरें और भी
तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का आदेश
स्थिति को बेहद अत्यावश्यक मानते हुए मैदानी अधिकारियों और इंजीनियरों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने साफ कहा है कि बारिश के बीच भी किसी सड़क के टूटने, पुल के कमजोर होने या जलभराव से यातायात बाधित होने की सूचना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जहां भी खतरे की आशंका हो, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।
सरकार के सामने अब केवल टूटी सड़कों की मरम्मत नहीं, बल्कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षित आवाजाही और सामान्य जनजीवन को पटरी पर लाने की चुनौती है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि ‘वॉर मोड’ का आदेश जमीन पर कितनी तेजी से उतरता है और बंद पड़े रास्तों पर यातायात कब तक सामान्य हो पाता है।