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    ओडिशा में आंदोलनकारी डॉक्टरों का वेतन रोकने का आदेश, संविदा डॉक्टरों की सेवा समाप्ति का नोटिस

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 10:59 AM (IST)

    ओडिशा सरकार ने आंदोलनकारी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोकने और संविदा डॉक्टरों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी करने का आदेश दिया ...और पढ़ें

    ओडिशा में आंदोलनकारी डॉक्टरों का वेतन रोकने का आदेश ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    ओडिशा में आंदोलनकारी डॉक्टरों का वेतन रोकने का आदेश ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    HighLights

    1. सरकार ने आंदोलनरत डॉक्टरों का वेतन रोकने का आदेश दिया।

    2. संविदा डॉक्टरों को सेवा समाप्ति का औपचारिक नोटिस जारी किया गया।

    3. ओएमएसए ने मांगों पर कार्रवाई तक हड़ताल जारी रखने की घोषणा की।

    जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने आंदोलनरत डॉक्टरों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने मरीजों की सेवा छोड़कर आंदोलन में शामिल डॉक्टरों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया है। 

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्यव्यापी आंदोलन में शामिल संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) डॉक्टरों को औपचारिक नोटिस जारी किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उनकी सेवाएं समाप्त की जाए।

    वेतन रोकने के स्पष्ट निर्देश जारी

    सरकार ने ओडिशा मेडिकल एंड हेल्थ सर्विसेज (ओएमएचएस) कैडर के चिकित्सा अधिकारियों का वेतन रोकने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में आधिकारिक पत्र राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों तथा मुख्य जिला चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य अधिकारियों (सीडीएमओ-पीएचओ) को भेजे गए हैं।

    इस बीच सरकार ने डॉक्टरों से आंदोलन वापस लेकर सामान्य सेवाएं बहाल करने की अपील भी की है। हालांकि, ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (ओएमएसए) ने पीछे हटने से इनकार करते हुए घोषणा की है कि उनकी 10 सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक हड़ताल जारी रहेगी।

    क्या है डॉक्टरों की प्रमुख मांगें?

    एसोसिएशन संरचनात्मक सुधारों की मांग कर रही है, जिनमें पात्रता की तिथि से केंद्र सरकार के वेतन ढांचे के अनुरूप डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) योजना लागू करना, सभी ग्रेडों में अनुपातिक कैडर पुनर्गठन, विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों, डिप्लोमा धारक चिकित्सकों तथा प्रशासकों के लिए बेहतर प्रोत्साहन राशि, साथ ही पोस्टमार्टम कार्य के लिए अलग भत्ता शामिल है।

    संवाद की बजाय दंडात्मक कार्रवाई का आरोप

    डॉक्टर संगठन के प्रतिनिधियों ने सरकार के इस रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी मांगों पर बातचीत करने के बजाय प्रशासनिक मशीनरी का उपयोग उन्हें दंडित करने के लिए किया जा रहा है।

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    ओएमएसए के सदस्य डॉ. सौम्य रंजन नायक ने कहा, “हमें पहले से अंदेशा था कि सरकार ईएसएमए (इएसएमए) के तहत कार्रवाई करेगी। हमने पिछले छह महीनों में कई बार अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं, लेकिन कोई प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया। 

    हड़ताल शुरू होने के सिर्फ दो दिन बाद बिना किसी चर्चा के सरकार ने कार्रवाई संबंधी पत्र जारी कर दिया। हम एक लोकतांत्रिक राज्य में रहते हैं। हम डॉक्टर हैं, लेकिन हमारे भी कुछ मूलभूत अधिकार हैं। उन्हें पाने के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”

    संविदा डॉक्टरों की भूमिका पर जोर

    एसोसिएशन ने यह भी कहा कि वर्तमान गतिरोध के दौरान संविदा डॉक्टर ही स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    ओएमएसए के अध्यक्ष किशोर चंद्र मिश्रा ने कहा कि आज तक संविदा डॉक्टर काम कर रहे हैं और इसी वजह से आपातकालीन सेवाएं सुचारु बनी हुई हैं। यदि उन्हें इस तरह की धमकियां मिल रही हैं तो ओएमएसए उनसे भी आंदोलन में शामिल होने का अनुरोध करता है। 

    जब हमने बार-बार अपनी मांगें रखीं और कहा कि हम आंदोलन नहीं करना चाहते, तब सरकार ने हमारी बातों पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन जैसे ही हमने आंदोलन शुरू किया, अब सरकार हमसे इसे वापस लेने की अपील कर रही है, ताकि वह फिर से हमारी मांगों को नजरअंदाज कर सके और उन पर कार्रवाई न करनी पड़े।

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