अस्पताल के बेड से राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक तक, ऐसे पहुंचीं मुक्केबाज जैस्मीन लैंबोरिया
राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत से कुछ हफ्ते पहले 57 किलो वर्ग में मुक्केबाजी की विश्व चैंपियन जैस्मीन लैंबोरिया अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी थीं। ...और पढ़ें
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जैस्मीन लैंबोरिया

समय कम है?
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ग्लास्गो, पीटीआई। राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत से कुछ हफ्ते पहले 57 किलो वर्ग में मुक्केबाजी की विश्व चैंपियन जैस्मीन लैंबोरिया अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी थीं। बीमारी से जूझ रहीं जैस्मीन राष्ट्रमंडल खेलों में खेलेंगी या नहीं, पक्का नहीं था लेकिन शनिवार को उन्होंने इतिहास रच दिया।
भिवानी से आने वाली जैस्मीन ने राष्ट्रमंडल खेलों की मौजूदा स्वर्ण पदक धारक उत्तरी आयरलैंड की माइकेला वाल्श को हराकर ये पदक अपने नाम कर लिया। चार साल पहले जैस्मिन ने बर्मिंघम में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता था।
इस मैच को देखने वालों को पता है कि जैस्मीन यहां वाल्श पर पूरी तरह से हावी रहीं लेकिन इस मैच से पहले कई महीनों तक जैस्मीन के लिए खुद को संभालना मुश्किल हो रखा था। इसी साल मार्च में हुई एशियन चैंपियनशिप के बाद से वह लगातार बीमारियों से जूझ रही थीं।
Golden glory continues in the boxing ring! 🥇🥊🇮🇳
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) August 1, 2026
Heartiest congratulations to Jaismine on clinching the Gold Medal in the Women's 57 kg Boxing event at the Commonwealth Games. The nation salutes your dedication and wishes you many more victories! #Cheer4Bharat #CWG2026 pic.twitter.com/PdeiBoCpfy
जैस्मीन ने भयंकर बुखार के बावजूद यहां फाइट की और तीन बाउट्स जूझते हुए फाइनल में पहुंचीं, हालांकि यहां उन्हें हार मिली लेकिन इस मैच के जरिए जैस्मीन ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में जगह बना ली। हालांकि, भारी बुखार में लड़ने का नुकसान हुआ और फाइनल के दौरान सिर में लगे मुक्के ने काम और बिगाड़ दिया।
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कंकशन की पीड़ा से जैस्मीन उबरीं तो बीमारी लौट आई। उन्होंने इस बारे में बताया कि भारत लौटने के बाद मैंने लगभग 20 दिन ट्रेनिंग की और फिर बीमार पड़ गई। तेज बुखार जा ही नहीं रहा था, खूब सारी दवाइयां लेनी पड़ती, कुछ वक्त तो अस्पताल में भी बिताना पड़ा। पता ही नहीं कि बीमारी क्या थी, लेकिन इसके चलते वह जून में बाकी मुक्केबाजों के साथ अभ्यास के लिए चेक गणराज्य नहीं जा पाईं।
Another glorious milestone for Indian sports! 🇮🇳🥇
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) August 1, 2026
Heartiest congratulations to the exceptional Jaismine Lamboria on winning the Gold medal in the Women’s 57 kg Boxing event at #CWG2026.
May you continue to make Bharat proud on the world stage. pic.twitter.com/C2tpFAbmIy
जैस्मीन के वर्ग की मुक्केबाजी एशियाई खेलों में नहीं होगी, इसलिए उनके लिए राष्ट्रमंडल खेल ही साल का सबसे बड़ा आयोजन थे लेकिन हालात ऐसे कि लग ही नहीं रहा था कि वह इसमें खेल भी पाएंगी। बाद में उन्हें वापसी के दौरान मनोचिकित्सक की मदद भी लेनी पड़ी, धीरे-धीरे जैस्मिन का आत्मविश्वास लौटा और उन्होंने थोड़ा-बहुत अभ्यास शुरू किया।
हालांकि जैस्मिन जब राष्ट्रमंडल खेलों के लिए ग्लास्गो आईं तो बाकी मुक्केबाजों की तुलना में उन्होंने सबसे कम अभ्यास किया था, लेकिन अंत में वह अपने पदक का रंग बदलने में कामयाब रहीं। जैस्मिन ने सोना जीतने के बाद कहा भी कि इन राष्ट्रमंडल खेलों में उनका लक्ष्य पदक का रंग बदलना ही था।
VIDEO | Glasgow, Scotland: World champion Jaismine Lamboria, who dethroned Michaela Walsh to win the 57kg boxing gold medal at the Commonwealth Games, says, "It feels amazing. I had come here with the hope of changing the colour of my medal, and now I have won gold."
— Press Trust of India (@PTI_News) August 1, 2026
(Full video… pic.twitter.com/lvQTgyzHL2
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