मेडल जीतने से आगे बढ़कर चैंपियन बनाने वाले कोच थे जसपाल राणा
जसपाल राणा, एक महान खिलाड़ी और कोच, ने दिल्ली की शूटिंग रेंजों में सैकड़ों युवा निशानेबाजों को तराशकर भारत को कई चैंपियन दिए। उनका अनूठा कोचिंग तरीका ...और पढ़ें

जसपाल राणा का हुआ निधन
HighLights
दिल्ली में सैकड़ों युवा निशानेबाजों को दिया प्रशिक्षण
खिलाड़ियों के मानसिक संतुलन पर केंद्रित था उनका तरीका
भारतीय निशानेबाजी में उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली: जब भी भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम अध्याय लिखे जाएंगे, जसपाल राणा का नाम केवल एक महान खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे गुरु के रूप में याद किया जाएगा जिसने देश को नई पीढ़ी के चैंपियन दिए।
एशियाई खेलों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का गौरव बढ़ाने वाले राणा ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा दिल्ली की शूटिंग रेंजों और राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों में बिताया, जहां उन्होंने युवा खिलाड़ियों के सपनों को आकार दिया।
सैकड़ों खिलाड़ियों का बनाया भविष्य
दिल्ली लंबे समय से भारतीय शूटिंग का प्रमुख केंद्र रही है। राष्ट्रीय स्तर के कैंप, चयन ट्रायल और बड़े टूर्नामेंट यहीं आयोजित होते रहे हैं। ऐसे माहौल में जसपाल राणा ने कोच की भूमिका निभाते हुए सैकड़ों खिलाड़ियों को न केवल निशाना लगाना सिखाया, बल्कि दबाव में खुद पर विश्वास बनाए रखना भी सिखाया। जसपाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज से पढ़ाई की थी।
उनका जन्म 1976 में उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी में हुआ था। परिवार उन्हें कामयाब बनाने के लिए दिल्ली लेकर आ गया था। वही उनके छोटे भाई सुभाष राणा भी पैरा खिलाड़ियों को शूटिंग का प्रशिक्षण देते है।
उनकी कोचिंग का तरीका पारंपरिक नहीं था। वे खिलाड़ियों के स्कोर से पहले उनके चेहरे पढ़ते थे। एक बार दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय शिविर के दौरान एक प्रतिभाशाली निशानेबाज लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा था। कई विशेषज्ञ तकनीकी कारण तलाश रहे थे, लेकिन राणा ने खिलाड़ी से कुछ देर बातचीत की और समझ गए कि समस्या उसके मन में है।
उन्होंने उसे अभ्यास से थोड़ी दूरी बनाने, खुद को शांत रखने और परिणाम की चिंता छोड़ने की सलाह दी। अगले दिन वही खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ लौटा और बेहतरीन प्रदर्शन किया। यह घटना उनके खिलाड़ियों को समझने की अद्भुत क्षमता का उदाहरण मानी जाती है।
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ट्रिगर से पहले दिमाग पर दें ध्यान
जसपाल राणा का मानना था कि शूटिंग में ट्रिगर दबाने से पहले दिमाग का स्थिर होना जरूरी है। यही सोच उन्हें बाकी कोचों से अलग बनाती थी। दिल्ली की रेंजों में उन्होंने कई ऐसे खिलाड़ियों को तराशा, जिन्होंने आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन किया। जसपाल राणा के भाई सुभाष राणा ने कहा कि आज भले ही जसपाल राणा हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन दिल्ली की शूटिंग रेंजों में उनकी सीख, उनका अनुशासन और खिलाड़ियों में भरा आत्मविश्वास उनकी विरासत के रूप में हमेशा जीवित रहेगा। भारतीय निशानेबाजी की नई पीढ़ी में उनका योगदान आने वाले वर्षों तक महसूस किया जाता रहेगा।