नार्वे शतरंज का खिताब जीतना मेरे करियर का सबसे विशेष पल : आर प्रगनानंद
नार्वे शतरंज का खिताब जीतकर इतिहास रचने वाले भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रगनानंद ने कहा कि यह भारतीय शतरंज के लिए सबसे रोमांचक समय है। ...और पढ़ें
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ग्रैंडमास्टर आर प्रगनानंद
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। नार्वे शतरंज का खिताब जीतकर इतिहास रचने वाले भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रगनानंद ने कहा कि यह भारतीय शतरंज के लिए सबसे रोमांचक समय है और भारतीय खिलाड़ी लगातार अच्छे परिणाम हासिल कर रहे हैं।
टूर्नामेंट में नंबर एक मैग्नस कार्लसन को दो बार हारने पर प्रगनानंद ने कहा कि मैग्नस को हराना हमेशा खास होतो है क्योंकि उन्हें हराने के लिए शुरुआत से अंत तक सतर्क रहना होता है। प्रगनानंद से नितिन नागर ने विशेष बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश:
नार्वे शतरंज जीतने पर बधाई। यह उपलब्धि आपके लिए कितनी खास है और आप इसे अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में कहां रखते हैं?
धन्यवाद। यह निश्चित रूप से मेरे करियर के सबसे विशेष पलों में से एक है और शायद अब तक जीता गया मेरा सबसे बड़ा खिताब भी। नार्वे शतरंज दुनिया के सबसे मजबूत टूर्नामेंटों में से एक है और इस बार इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों का स्तर बेहद ऊंचा था। ऐसे शीर्ष खिलाड़ियों के बीच पहला स्थान हासिल करना मेरे लिए बेहद संतोषजनक है।
विसेंट कीमर को निर्णायक दौर में हराने के बाद आपके मन में क्या चल रहा था?
सच कहूं तो मेरा पूरा ध्यान सिर्फ मुकाबले पर था और मैं अंक तालिका या संभावित नतीजों के बारे में ज्यादा नहीं सोच रहा था। जैसे ही मुकाबला खत्म हुआ, मुझे काफी राहत महसूस हुई क्योंकि यह एक लंबा और चुनौतीपूर्ण टूर्नामेंट था। खराब शुरुआत के बाद लगातार चार जीत के साथ खिताब जीतना मेरे लिए बेहद संतोषजनक और सुखद अनुभव रहा।
आपने नार्वे शतरंज में नंबर वन मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया। इसे आप कैसे देखते हैं?
मैग्नस को हराना हमेशा खास होता है क्योंकि वह कई वर्षों से शतरंज की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे हैं। हालांकि टूर्नामेंट के दौरान मेरा ध्यान अधिकतर अंक जुटाने और अपनी स्थिति मजबूत करने पर था। उनकी विरुद्ध मिली ये जीतें महत्वपूर्ण थीं क्योंकि उन्होंने मुझे खिताब की दौड़ में बनाए रखा और आगे बढ़ने में मदद की।
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कार्लसन को इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में गिना जाता है। उनके खिलाफ खेलते समय सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है?
सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वह पूरे खेल के दौरान लगातार आपके सामने नई समस्याएं खड़ी करते रहते हैं। यहां तक कि बराबरी की स्थिति में भी वह आपके लिए मुश्किलें पैदा करने का तरीका ढूंढ लेते हैं। मैग्नस के विरुद्ध पहली चाल से लेकर आखिरी चाल तक पूरी तरह सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि वह लगभग किसी भी स्थिति से मौके निकाल सकते हैं।
आप विश्वनाथन आनंद के बाद एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार हराने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। ये आपके के लिए कितना महत्व रखता है?
यह निश्चित रूप से एक अच्छा आंकड़ा है। सच कहूं तो मुझे इसके बारे में पहले जानकारी नहीं थी और मैं इनके बारे में ज्यादा नहीं सोचता। लेकिन यह जानकर अच्छा लगता है। आनंद सर हम सभी के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा हैं और मैं इस उपलब्धि के लिए खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं।
आपके विकास और करियर में विश्वनाथन आनंद की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही है?
भारतीय शतरंज पर आनंद सर का प्रभाव शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने मेरी पीढ़ी सहित पूरे देश के खिलाड़ियों को प्रेरित किया है। हमें उनके अनुभव और खेल की गहरी समझ से सीखने का अवसर मिला है। वह हमेशा सहयोगी रहे हैं और उनकी सलाह ने मेरे विकास में काफी मदद की है।
आज भारत के पास आप, गुकेश और अर्जुन एरिगैसी जैसे खिलाड़ी हैं जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती दे रहे हैं। आप इस प्रतिस्पर्धा को कितना स्वस्थ मानते हैं?
मुझे लगता है कि यह प्रतिस्पर्धा हम सभी के लिए बेहद सकारात्मक रही है। गुकेश और अर्जुन जैसे खिलाड़ियों की सफलता मुझे और अधिक मेहनत करने और खुद को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करती है। जब हम एक-दूसरे के खिलाफ खेलते हैं तो पूरी प्रतिस्पर्धा होती है, लेकिन बोर्ड के बाहर हमारे बीच काफी सम्मान और दोस्ताना संबंध हैं। अंततः हम सभी भारतीय शतरंज का स्तर ऊपर उठाने में योगदान दे रहे हैं।
क्या आपको लगता है कि यह भारतीय शतरंज का स्वर्णिम दौर है?
निश्चित रूप से यह भारतीय शतरंज के लिए बहुत रोमांचक समय है। हमारे कई युवा खिलाड़ी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और लगातार अच्छे परिणाम हासिल कर रहे हैं। इसे स्वर्णिम दौर कहना या नहीं कहना लोगों पर छोड़ता हूं, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि भारतीय शतरंज आज बहुत मजबूत स्थिति में है।
हमें प्रशंसकों, सरकार और कारपोरेट जगत से भरपूर समर्थन मिल रहा है। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे अदाणी समूह का सहयोग प्राप्त है। वे परिवार की तरह हर कदम पर मेरा साथ दे रहे हैं।
किसी लंबे और मानसिक रूप से थका देने वाले टूर्नामेंट के बाद आप खुद को कैसे तरोताजा करते हैं?
आमतौर पर मैं अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद करता हूं। इसके अलावा शो देखना या कुछ समय के लिए शतरंज से पूरी तरह दूरी बना लेना भी अच्छा लगता है। हम लगातार यात्रा करते हैं और अधिकांश समय खेल के बारे में सोचते रहते हैं, इसलिए समय-समय पर खुद को मानसिक रूप से तरोताजा करना बहुत जरूरी होता है।
शीर्ष स्तर पर शतरंज मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण खेल है। आप दबाव को कैसे संभालते हैं?
दबाव ऐसी चीज है जिसका सामना हर खिलाड़ी करता है। पिछले कुछ वर्षों में मैंने सीखा है कि इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका सामने मौजूद स्थिति पर ध्यान केंद्रित करना है। अगर आप परिणाम या भविष्य के बारे में बहुत ज्यादा सोचते हैं तो दबाव बढ़ जाता है। इसलिए मैं वर्तमान पल का आनंद लेने और बहुत आगे की चिंता न करने की कोशिश करता हूं। नोट : ‘गर्व है’ पहल के तहत अदाणी स्पोर्ट्सलाइन प्रगनानंद का समर्थन करता है।