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    धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम बिल पर SGPC की बैठक; जानकारी न देने पर सरकार पर उठाया सवाल

    Updated: Fri, 27 Mar 2026 05:56 PM (IST)

    शिरोमणि समिति ने धार्मिक ग्रंथ अपमान रोकथाम विधेयक पर बैठक कर सरकार से जानकारी न मिलने पर नाराजगी जताई। समिति ने कहा कि बिना पूरी जानकारी के सार्थक सु ...और पढ़ें

    एसजीपीसी की गठित उच्च स्तरीय उप समिति की चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए।

    एसजीपीसी की गठित उच्च स्तरीय उप समिति की चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए।

    HighLights

    1. SGPC ने धार्मिक ग्रंथों के अपमान बिल पर कड़ा रुख अपनाया।

    2. मुख्यमंत्री के बयान भ्रामक, सरकार पर जानकारी न देने का आरोप।

    3. विधेयक के त्रुटिपूर्ण अनुवाद और दुरुपयोग पर SGPC चिंतित।

    डिजिटल डेस्क, अमृतसर। पंजाब में प्रस्तावित धार्मिक ग्रंथों के अपमान की रोकथाम संबंधी विधेयक को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सख्त रुख अपनाया है। इस मुद्दे पर गठित उच्च स्तरीय उप समिति की चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में बैठक हुई, जिसमें कई वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ, विद्वान और समिति सदस्य शामिल हुए।

    बैठक के दौरान पंजाब सरकार द्वारा प्रस्तावित “पंजाब धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक 2025” पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों पर भी विचार किया गया।

    उप समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश मोहिंदर मोहन सिंह बेदी ने बैठक के बाद कहा कि मुख्यमंत्री का बयान भ्रम पैदा करने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री द्वारा जिस कानून का उल्लेख किया गया, वह वर्ष 2008 का अधिनियम है, जो केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशन और वितरण से संबंधित है, जबकि नया प्रस्तावित विधेयक सभी धर्मों के ग्रंथों के अपमान से जुड़ा है।

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    लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही 

    उन्होंने कहा कि दोनों अलग-अलग विषयों को एक साथ जोड़कर प्रस्तुत करने से लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक शिरोमणि समिति से कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया और न ही विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा साझा किया है।

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    उप समिति ने यह भी कहा कि उन्होंने कई बार पत्र लिखकर आवश्यक जानकारी मांगी, लेकिन सरकार और विधानसभा की चयन समिति द्वारा अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई। इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    समिति के अनुसार, वर्ष 2016 और 2018 में पारित विधेयकों में किन कमियों के कारण उन्हें लागू नहीं किया जा सका, इस संबंध में भी जानकारी मांगी गई थी। साथ ही प्रस्तावित कानून के संभावित दुरुपयोग को रोकने के उपायों पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया था।

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    विधेयक का पंजाबी अनुवाद त्रुटिपूर्ण

    उप समिति ने यह भी चिंता जताई कि विधेयक का पंजाबी अनुवाद त्रुटिपूर्ण है, जिससे भविष्य में कानूनी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। समिति के सदस्यों का मानना है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में कानून बनाते समय सभी पहलुओं पर गहराई से विचार जरूरी है। ऐसे में पर्याप्त जानकारी के बिना सुझाव देना संभव नहीं है।

    बैठक के अंत में समिति ने दोहराया कि जब तक मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई जाती, तब तक सार्थक सुझाव देना संभव नहीं होगा।

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