बठिंडा में साइबर ठगों ने 9 साल में उड़ाए 42 करोड़, पुलिस को मिली 12 हजार शिकायतें; RTI रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
आरटीआई के अनुसार बठिंडा में वर्ष 2018 से 15 मई 2026 तक साइबर ठगी के 12,660 मामले दर्ज हुए। 42.71 ...और पढ़ें

RTI में मिली जानकारी।
HighLights
बठिंडा में 9 साल में 42.71 करोड़ रुपये की साइबर ठगी।
केवल 3.14 करोड़ रुपये ही पीड़ितों को वापस मिल पाए।
साइबर अपराधों में लगातार वृद्धि, 2,507 शिकायतें लंबित।
जागरण संवाददाता, बठिंडा। डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं का दायरा बढ़ने के साथ बठिंडा जिले में साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। बठिंडा जिले में पूर्व 9 साल में हजारों लोगों के साइबर ठगी से 42.71 करोड़ रुपये डूबे है, लेकिन इनमें से केवल 3.14 करोड़ हुए रिफंड हो सके। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी ने बठिंडा जिले में साइबर ठगी के बढ़ते खतरे की तस्वीर सामने रखी है।
वर्ष 2018 से 15 मई 2026 तक साइबर ठगी से जुड़े 12 हजार 660 मामले पुलिस के पास पहुंचे। इन मामलों में लोगों से कुल 42 करोड़ 71 लाख 46 हजार 331 रुपये की ठगी हुई, लेकिन पीड़ितों को केवल 3 करोड़ 14 लाख 32 हजार 35 रुपये ही वापस मिल सके। यानी ठगी गई कुल राशि का केवल लगभग सात प्रतिशत ही रिकवर हो पाया, जबकि करीब 39.57 करोड़ रुपये अब भी वापस नहीं मिल सके हैं।
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10 हजार मामलों का हुआ निपटारा
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अवधि में दर्ज 12 हजार 660 शिकायतों में से 10 हजार 153 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जबकि 2 हजार 507 शिकायतें अभी भी लंबित हैं। सबसे अधिक लंबित मामले वर्ष 2025 और वर्ष 2026 के हैं। वर्ष 2025 में दर्ज 3 हजार 10 शिकायतों में से 1 हजार 777 मामलों का निपटारा नहीं हो सका। वहीं 15 मई 2026 तक प्राप्त 996 शिकायतों में से 730 मामले लंबित हैं।
आंकड़े बताते हैं कि जिले में साइबर अपराध लगातार बढ़ते गए हैं। वर्ष 2019 में केवल 69 शिकायतें दर्ज हुई थीं। इसके बाद वर्ष 2020 में 493, वर्ष 2021 में 847, वर्ष 2022 में 1 हजार 788, वर्ष 2023 में 2 हजार 434, वर्ष 2024 में सबसे अधिक 3 हजार 23 और वर्ष 2025 में 3 हजार 10 शिकायतें दर्ज की गईं। 15 मई 2026 तक भी 996 मामले दर्ज हो चुके हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ साइबर ठगों की सक्रियता भी लगातार बढ़ रही है।
नए-नए पैंतरे अपनाते हैं ठग
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी फर्जी कॉल, केवाईसी अपडेट के नाम पर धोखाधड़ी, निवेश योजनाओं, ऑनलाइन नौकरी के झांसे, सोशल मीडिया खातों की हैकिंग, ओटीपी और यूपीआई पिन हासिल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। ठगी की रकम कुछ ही मिनटों में अलग-अलग खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से स्थानांतरित कर दी जाती है, जिससे रकम की रिकवरी काफी कठिन हो जाती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। किसी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक पर बिना पुष्टि के प्रतिक्रिया देने से बचें।
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जल्द से जल्द हेल्पलाइन का ले सहारा
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है।
आरटीआई से सामने आए ये आंकड़े बताते हैं कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और समय पर शिकायत ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
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