'सतलुज' फिल्म में 25 हजार लापता लोगों के दावे पर भड़के रवनीत बिट्टू; सबूत न देने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म 'सतलुज' में 25 हजार लोगों के लापता होने के दावे पर दस्तावेजी प्रमाण मांगे। उन्होंने कहा कि सबूत नहीं ...और पढ़ें

केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू व फिल्म सतलुज का पोस्टर।
HighLights
रवनीत बिट्टू ने 'सतलुज' फिल्म के दावे को चुनौती दी।
25 हजार लापता लोगों के सबूत सार्वजनिक करने की मांग।
सबूत न देने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। केंद्रीय रेल राज्य एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म 'सतलुज' में 25 हजार लोगों के लापता होने अथवा अवैध रूप से अंतिम संस्कार किए जाने के दावे को लेकर निर्माता और निर्देशक को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि फिल्म में किए गए दावे के समर्थन में सरकारी रिकार्ड, दस्तावेजी साक्ष्य, न्यायिक निष्कर्ष और प्रमाणित आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।
यदि ऐसा नहीं किया जाता तो उपलब्ध सभी संवैधानिक और कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि यदि निर्माता-निर्देशक 25 हजार लापता या गैर-कानूनी तरीके से अंतिम संस्कार किए गए लोगों के दावे को प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर साबित कर देते हैं तो वह सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे।
लेकिन यदि यह आंकड़ा केवल अनुमान या आरोपों पर आधारित है तो उसे निर्विवाद ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
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आतंकवाद का एकतरफा इतिहास दिखाया
बिट्टू ने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर विवादित दावों को स्थापित इतिहास के रूप में पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 25 हजार का आंकड़ा किसी अंतिम न्यायिक फैसले या आधिकारिक रिकॉर्ड से प्रमाणित नहीं है तो दर्शकों को यह जानकारी क्यों नहीं दी गई। राज्य मंत्री नेवकहा कि आतंकवाद के दौर का इतिहास एकतरफा नहीं दिखाया जा सकता।
निर्दोष हिंदुओं, बस यात्रियों, दुकानदारों, सरकारी कर्मचारियों, मजदूरों और अन्य आम नागरिकों की हत्याओं के साथ-साथ आतंकवाद से लड़ते हुए शहीद हुए पंजाब पुलिस और सुरक्षा बलों के हजारों जवानों के बलिदान को भी समान महत्व मिलना चाहिए। आतंकवाद से तबाह हुए हजारों परिवारों की पीड़ा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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दावों को प्रमाणित करें या कार्रवाई झेलें
रवनीत सिंह ने कहा कि यदि निर्माता और निर्देशक तय समय के भीतर 25 हजार लोगों के दावे का पूरा दस्तावेजी आधार सार्वजनिक नहीं करते तो उन्हें यह स्वीकार करना चाहिए कि यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है।
ऐसा नहीं होने पर कानूनी और संवैधानिक कार्रवाई के विकल्पों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब का इतिहास चुनिंदा कथाओं के आधार पर नहीं लिखा जा सकता और इतिहास के मामले में भावनाओं नहीं, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।